भारत में नागरिकता संशोधन लागू मुस्लि समुदाय के प्रति राग द्वेष भेद चुनावी चतुराई स्पष्ट, वोटों को अपने पक्ष में करने की राजनीति ?

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भारत में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू मुस्लिम समुदाय के प्रति राग द्वेष भेद चुनावी चतुराई स्पष्ट , वोटों को अपने पक्ष में करने की राजनीति ?

देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) लागु हो गया है। 1950 नागरिकता कानून को संशोधन करके  अधिनियम को दोनों सदनों में पारित किया गया और राष्ट्रपति से अनुमोदित होकर लागु किया गया। भाजपा ने ऐसे समय में लागू किया ठीक लोकसभा का चुनाव होने वाले है। और इस नागरिकता संशोधन अधिनियम में पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आये हुए हिन्दू,सिख, जैन,बौद्ध पारसी और इसाई को जो भारत में 2014 के पहले पांच वर्ष से रह रहे है वह नागरिकता का अधिकारी होगा इस CAA नागरिकता संशोधन अधिनियम से भारतीयों पर कोई असर नही होगा कहा जाता है बाहरी देश पाकिस्तान, बंग्लादेश और अफगानिस्तान से पलायन कर रहने वाले मुस्लिमो को नागरिकता प्राप्ति अधिकार से दूर रखा है लेकिन बड़ी संख्या में हिन्दु सिख जैन बौद्ध पारसी इसाई को नागरिकता दिये जाने के प्रावधान अपने पक्ष में वोट करने की राजनीति है । देश की आजादी में मुस्लिमो का बराबरी सहयोग रहा है लेकिन आर एस एस की सत्ताधारी राजनीति दल भाजपा मुस्लिमो को दुश्मनी का पर्याय मानती रही हिन्दु मुस्लिम सम्प्रदाय करती रही है।इसका राजनीतिक फायदा किसे होगा यह समय बताएगा। मुस्लिम समुदाय के प्रति राग द्वेष भेद स्पष्ट भारत में मुस्लिम समुदाय को हिन्दू राष्ट्रवादीयो के कहा अनुसार रहना होगा चुनावी चतुराई स्पष्ट है। लेकिन इस कानून से मतुआ समाज जो संत हरिचंद ठाकुर के अनुयाई  दलित अवर्ण बंगाली नमोशुद्र हिन्दुओं का ही समुदाय है जो पाकिस्तान बांग्लादेश से आकर शर्णार्थियों के रुप यहां रह रहे है उनको राहत मिली है।

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