होली के त्यौहार मे होलिका की शहादत को न मानते हुए काल्पनिक शुद्र महिला को जलाना महिला का अपमान-होली का त्यौहार उमंग उत्साह से मनाने का मुलनिवासी एससी एसटी ओबीसी शुद्रो का है?
होली के त्यौहार मे होलिका की शहादत न मानते हुए काल्पनिक शुद्र महिला को जलाना महिला का अपमान -होली का त्यौहार उमंग उत्साह से मनाने का मुलनिवासी एससी एसटी ओबीसी शुद्रो का है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार भारत के मुलनिवासी एससी-एसटी ओबीसी शुद्रो को असुर दैत्य माना जाता था.राजा हिरन्याकश्यप को असुर दैत्य कहा जाता था जबकि हिरन्याकश्यप बुध्दिस्ट हरदोही उतरप्रदेश राज्य का सुशील न्याय प्रिय बहादुर शासक राजा था. जिनका पुत्र प्रहलाद, बहादुर बहन होलिका थी महिला थी.जानकरी कहानी के अनुसार हिरन्याकश्यप का छोटा भाई हिरणायक्ष था जिसका वध आर्य ब्राह्मण विष्णु ने किया था. तब से हिरन्याकश्यप ने अपने राज्य मे आर्य ब्राह्मण विष्णु पर राज्य मे रहने पर प्रतिबंध लगा दिया शस्त्रु हो गया था. हिरन्याकश्प से दुश्मनी निकालने के लिए के लिए षड्यंत्र रचा गया प्रहलाद को चुगल लिया और मासमदिरा व्यसन नशे का नशेड़ी बना दिया. हिरन्याकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को विष्णु से दुर रहने के लिए बेहद कोशिश की लेकिन असफल रहे.नशे के लत से एक दिन प्रहलाद ने घर से बाहर निकल गया था. प्रहलाद बुआ होलिका फागुन पुर्णीमा के दिन विवाह तय हुआ था. होलिका ने अंतिम समय प्रहलाद से मिलने खाना खिलाने का सोचकर प्रहलाद से मिलने निकली. प्रहलाद अपने दोस्त मित्रो के साथ शराब के इतना नशे मे था कि अपने आप को समल भी नही पा रहा था. होलिका को प्रहलाद की तरफ आते देख प्रहलाद के दोस्त मित्रो की होलिका पर नियत खराब हो गई और हवस का शिकार बनाया मारकर जला डाला. होलिका के साथ घृणित घटना का पता लगने पर हिरन्याकश्यप ने घृणित घटना करने वालो को पकड कर मृत्युदण्ड दिया. ब्राह्मण आर्यो ने प्रहलाद को भगवान का श्रद्धा आस्थावान भक्त बनाकर होलिका की गोद मे बिठाया जलाने मे होलिका जलने प्रहलाद बचने बुराई के प्रति अच्छाई की जीत का प्रतीक बनाकर काली राख चेहरे पर लगा कर होलिका का त्यौहार बना दिया.होली का फाग्लुन पुर्णीमा का त्यौहार भारत प्रमुख माना जाता है.होलिका की शहादत को न मानते हुए एक काल्पनिक महिला की पुजापाठ करके जलाकर उमंग उत्साह मादक पदार्थ भांग शराब के नशे मे धुत होकर मौज मस्ती अश्लीलतापुर्वक रंगगुलाल पानी किचड से घुरेडी खेली मनाने की परम्परा है. क्या यह महिला का अपमान नही है?
