14अप्रैल संविधान निर्माता डाँ. भिमराव आम्बेडकर (बाबा साहब)की 135वी जयंती की हार्दिक शुभकामनायें।बाबा साहेब डाँ.आम्बेडकर के प्रति पुरा देश नस्तमस्तक उच्च शिक्षित पीएचडी करने वाले दलित समाज के पहले मानवतावादी महान महापुरुष थे।

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14अप्रैल संविधान निर्माता डाँ. भिमराव आम्बेडकर (बाबा साहब)की 135वी जयंती की हार्दिक शुभकामनायें।बाबा साहेब डाँ.आम्बेडकर के प्रति पुरा देश नस्तमस्तक उच्च शिक्षित पीएचडी करने वाले दलित समाज के पहले मानवतावादी महान महापुरुष थे।

संविधान निर्माता डाँ. भिमराव आम्बेडकर का जन्मदिन विश्व भर मे हर्ष उत्साह से मनाई जा रही है।विश्व के दो सौ देश मिलकर अमेरिका जैसे देश ने जयंती की छुट्टी घोषित कर दी है।डाँ. बाबा साहेब आम्बेडकर अपने को पहले भारतीय अंत मे भी भारतीय मानते थे दलित बौद्ध नही मानते थे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अपने समय के सबसे शिक्षित भारतीयों में से एक थे, जिनके पास 32 डिग्रियां थीं। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और ग्रेज़ इन (लंदन) से बीए, एमए, एमएससी, पीएचडी, डीएससी, एलएलडी, डी.लिट और बैरिस्टर-एट-लॉ जैसी प्रमुख डिग्रियां प्राप्त कीं। वह विदेश से डॉक्टरेट (PhD) करने वाले पहले भारतीय थे।  उनका कार्य किसी विशिष्ट समाज धर्म या जाति के लिए नही बल्कि पुरे राष्ट्र के लिए था।उनके जन्मदिन पर उनका समाज निला झंडा फहराता है। इसका तात्पर्य है कि नीले आकाश विशाल भिमराव आम्बेडकर बाबा साहेब जैसा कोई नही है। जहां विचार बदलते है वही देश का भविष्य लिखा जाता है, और सघर्ष उसी को चुनता है जिनमे लडने की क्षमता होती ह। शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो कोई साधारण नही है क्रांतिकारी आवाज , करोडो बेडियो को तोडने वाला नारा रहा है।आधुनिक भारत के निर्माता संविधान के मुख्य शिल्पकार डाँ. भिमराव रामजी आम्बेडकर का असाधारण और प्रेणादायक जीवन सफर रहा है।बचपन मे ही छुआछूत और अपमान झेलते हुए शिक्षा को अन्याय से लडने का हथियार बनाया और देश का महान संविधान लिखा।सामाजिक अधिकार के लिए पानी के लिए महाड सत्याग्रह कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन महिलाओ के अधिकारो के लिए हिन्दू कोड बिल संसद मे पेश किया, बिल पेश नही होने पर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग की गांधी ने जिसकी जगह राजनीती आरक्षण को मंजूर किया। समता स्वतंत्रता बधुत्व के स्थाई समाधान के लिए बौद्ध धर्म को अपनाया और लाखो लोगो को बौद्ध धम्म की दिक्षा दी। डाँ. बाबा साहेब आम्बेडकर का जयंती का कार्यक्रम वैचारिक होना चाहिए ना की ढोल ढमाको डीजे पर थिरकने वाला। आज कल जयंती इसी तरह की मन रही इसलिए महापुरुषो के सामाजिक योगदान को भी लोग समझ नही रहे है। डाँ. बाबा साहेब का कहना है कि देश को आजादी मिल गई लोकतंत्र से अधिकार की स्वतंत्रता मिली लेकिन देश के बहुसंख्यक वंचित पिछडे समाज को सामाजिक धार्मिक आजादी नही मिल पाई है जिसकी वजह से आज भी गुलाम बने हुए है. जिसके लिए सघर्ष करना पडेगा।

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