*अनुसूचित जाति में उप वर्गीकरण संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है-जस्टिस बेला एम त्रिवेदी*
अनुसूचित जाति में उप वर्गीकरण संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है-जस्टिस बेला एम त्रिवेदी
जस्टिस बेला एम त्रिवेदी का बयान अनुसूचित जाति में उप वर्गीकरण के मुद्दे पर महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा है कि यह संविधान के अनुरूप नहीं है, क्योंकि संविधान में समानता और न्याय के सिद्धांतों को प्रमुखता दी गई है। उप वर्गीकरण से विभाजन और भेदभाव पैदा हो सकता है, जो संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन उप वर्गीकरण से इसका मकसद पूरा नहीं होगा। यह बयान एससी/एसटी समुदाय के हितों की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण है। जस्टिस त्रिवेदी के बयान से यह स्पष्ट होता है कि संविधान के अनुरूप निर्णय लेना आवश्यक है। उनके बयान से यह भी पता चलता है कि उप वर्गीकरण से एससी/एसटी समुदाय के भीतर विभाजन पैदा हो सकता है। जस्टिस त्रिवेदी के बयान का पूर्वांचल दलित अधिकार मंच (पदम) समर्थन करना है। यह बयान सामाजिक न्याय और समानता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करता है।जस्टिस त्रिवेदी के बयान से यह स्पष्ट होता है कि संविधान के मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है। यह बयान एससी/एसटी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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