
“अगर मैं झुक जाता… हम स्वाभिमान से जी नही सकते थे -डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
“अगर मैं झुक जाता…हम स्वाभिमान से जी नही सकते थे – बाबासाहेब आंबेडकर

दिलीप भुम्मरकर मो.941823217
बाबासाहेब एक बड़ी सभा में खड़े थे। लाखों लोग उनके पीछे खड़े थे। हाथ में संविधान, आँखों में सपने और होठों पर जलते हुए शब्द। बाबासाहेब ने कहा – “मैं अपने पूरे जीवन में नहीं झुका, क्योंकि अगर मैं झुक जाता, तो आप में से लाखों लोगों को आज सीधे खड़े होने का अधिकार नहीं मिलता। अगर मैं झुक जाता, तो आपकी पानी पीने की आज़ादी, स्कूल में बैठने का अधिकार, नौकरी का दरवाज़ा – ये सब हमेशा के लिए बंद हो जाते। अगर मैं झुक जाता, तो आपका जीवन गुलामी और अंधकार में बीतता।” ये शब्द सुनकर भीड़ की आँखें भर आईं। लोगों को एहसास हुआ – बाबासाहेब ने कभी अपनी खुशी, प्रसिद्धि या पद के लिए समझौता नहीं किया। वे झुके नहीं, इसीलिए आज हम सिर ऊँचा करके खड़े हैं। 👉 बाबासाहेब ने हार नहीं मानी, इसीलिए आज हम इंसान बनकर जी रहे हैं। 👉 उन्होंने हार नहीं मानी, इसीलिए आज हमारे हाथ में अधिकार हैं। 👉 उन्होंने गुलामी को नकारा, इसीलिए आज हम स्वाभिमान से साँस लेते हैं। उनकी अविनम्रता में ही हमारी आज़ादी की जीत निहित है।