UGC regulations समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं, तो फिर जातिवादी मनुस्मृति पर प्रतिबंध लगाने से उन्हें क्या रोक रहा है? : ॲड. प्रकाश आंबेडकर राष्ट्रीय अध्यक्ष, वंचित बहुजन आघाडी

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UGC regulations समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं, तो फिर जातिवादी मनुस्मृति पर प्रतिबंध लगाने से उन्हें क्या रोक रहा है? : ॲड. प्रकाश आंबेडकर

राष्ट्रीय अध्यक्ष, वंचित बहुजन आघाडी

क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय सामाजिक न्याय और समानता को कमजोर कर रहा है, जो भारतीय संविधान के मूल स्तंभ हैं और जिनका उद्देश्य ऐतिहासिक असमानताओं को समाप्त करना तथा गरिमा सुनिश्चित करना है?

क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 — जो छुआछूत की प्रथा को समाप्त करता है — को निष्प्रभावी कर रहा है?

क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय यह कह रहा है कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के हाथों उच्च जातियों को जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है?

क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय यह बताएगा कि कितने उच्च जाति के लोगों को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग द्वारा पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से वंचित किया गया है, या जिन्हें व्यवस्थित हिंसा — शारीरिक हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, यौन हिंसा — और दैनिक जीवन में सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा है?

यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय वास्तव में यह मानता है कि नई #UGC regulations समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं, तो फिर जातिवादी मनुस्मृति पर प्रतिबंध लगाने से उन्हें क्या रोक रहा है?

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