एक माँ की ममता ने जगाई जीवन की उम्मीद विधा : सामाजिक एवं भावनात्मक कहानी लेखक : निर्मल दास मानकर 7354089988 ” घर का चिराग”
एक माँ की ममता ने जगाई जीवन की उम्मीद
विधा : सामाजिक एवं भावनात्मक कहानी लेखक : निर्मल दास मानकर 7354089988
” घर का चिराग”
दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में छह वर्षीय कुनाल अपने माता-पिता के साथ रहता था। घर छोटा था, लेकिन खुशियों की कोई कमी नहीं थी। कुनाल की मासूम शरारतों से घर का हर कोना जीवंत रहता था। उसकी खिलखिलाहट माता-पिता की सारी थकान दूर कर देती थी।
पिता राजेश एक निजी कंपनी में काम करते थे। सुबह घर से निकलते समय कुनाल उन्हें दरवाजे तक छोड़ने आता और अपनी छोटी-छोटी उँगलियों से उनका हाथ पकड़कर कहता, “पापा, आज जल्दी आना। शाम को मेरे साथ क्रिकेट खेलना।”
राजेश मुस्कराकर कहते, “बिल्कुल बेटा! आज तुम्हारी गेंद पर छक्का मारूँगा।”
कुनाल तुरंत बोलता, “नहीं पापा, आप आउट हो जाना। मैं जीतूँगा।”
दोनों की हँसी से घर गूँज उठता।
माँ सीमा गृहिणी थी। उसकी सुबह कुनाल के स्कूल जाने की तैयारी से शुरू होती और रात को उसे कहानी सुनाकर सुलाने पर समाप्त होती।
कुनाल को अपनी माँ से बहुत लगाव था। वह छोटी-छोटी बातों के लिए भी माँ को ही आवाज लगाता।
“माँ, मेरी पानी की बोतल कहाँ है?”
“माँ, मेरा स्कूल बैग तैयार कर दो।”
“माँ, आज मुझे आपकी गोद में सोना है।”
सीमा कभी उसे डाँटती, कभी समझाती, लेकिन अंत में उसकी हर जिद के आगे हार जाती।
एक दिन कुनाल ने माँ से पूछा, “माँ, आप मुझे इतना प्यार क्यों करती हो?”
सीमा ने उसे अपनी गोद में उठाकर कहा, “क्योंकि तू मेरी जिंदगी है बेटा।”
कुनाल ने मासूमियत से कहा, “तो फिर मैं आपको कभी छोड़कर नहीं जाऊँगा।”
सीमा ने उसके माथे को चूम लिया। उसे क्या पता था कि यही शब्द भविष्य में उसके जीवन का सबसे बड़ा सहारा बनेंगे।
### 2\. अचानक बदल गया मौसम
मई का महीना था। दिल्ली की गर्मी अपने पूरे तेवर में थी। सड़कें तप रही थीं और दोपहर में घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था।
कुनाल पिछले कुछ दिनों से थोड
