छुआछूत भेदभाव से मुक्ति के लिए मानवीय गरीमा स्वाभिमान समता स्वतंत्रता बधुत्व के लिए अछुत वंचित दलित पिछडा समाज को बौद्ध धर्म और बाबा साहब की 22प्तिज्ञा को मान्यता देनी होगी।

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छुआछूत भेदभाव से मुक्ति के लिए मानवीय गरीमा स्वाभिमान समता स्वतंत्रता बधुत्व के लिए अछुत वंचित दलित पिछडा समाज को बौद्ध धर्म और बाबा साहब की 22प्तिज्ञा को मान्यता देनी होगी।

वंचित दलित पिछडा समाज कितना भी पढ लिखकर उच्च शिक्षित क्यों न हो जाये, परन्तु ढोग दिखावा छल कपट गुण पाखंडवाद बिना तर्क के बगैर सोचे समझे अंविश्वास की जाल में जकडा हुआ गुलामी का जीवन जी रहा है। महामानव बौद्धिसत्वपरमपुज्यनीय डाँ. बाबा साहब आम्बेडकर ने बौद्ध धर्म की दीक्षा के साथ 22प्रतिज्ञा इस लिए दिया था की मेरा अछुत वंचित दलित पिछडा समाज ब्राह्मण मनुवादीयो के झुटे मक्कार छलकपटी पाखंड और अंधविश्वासी रितीरिवाज परमपरा दुर रहकर छुआछूत भेदभाव वाले जीवन से मुक्त होकर समता स्वतंत्र बधुत्व स्वाभिमान का जीवन जीता रहे। लेकिन अछुत वंचित दलित पिछडा समाज ब्राह्मणी मनुवादीयो की भेदभाव अमानवीय वाले रितीरिवाज पाखंड अंधविश्वासीवाले रास्ते को अपने जीवन जीने को किस्मत का रास्ता मान बैठा, बाबा साहब द्वारा दिये गये 22प्रतिज्ञा नही मान रहा है। अछुत वंचित दलित पिछडा समाज छुआछूत भेदभाव से मुक्ति मानवीय गरीमा स्वभीमान समता स्वतंत्र बधुत्व सिधांत स्वयं की प्रगति के लिए 22प्रतिज्ञा को मान्य करना होगा।क्योंकि डाँ. बाबा साहब आम्बेडकर जैसे शिक्षित विद्वान अछुत वंचित दलित के दर्द को समझने वाला कल्याण के लिए लडने सघर्ष करने वाला कोई नहीं है। 22प्रतिज्ञा की शपथ बाबा साहब आम्बेडकर ने बहुत सोच समझ कर दी है। देश का शासन ब्राह्मणी मनु पुजीवादियो के कब्जे रहना है जो कभी नही चाहेंगे की देश से जातिभेदभाव गरीबी खत्म हो।

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