शराब नीति पर पुनर्विचार करने की मांग का लिखा पत्र गोड़वाना समग्र क्रांति आंदोलन ने।

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शराब नीति पर पुनर्विचार करने की मांग का लिखा पत्र गोड़वाना समग्र क्रांति आंदोलन ने।

गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोड़वाना समग्र कांति आंदोलन ने मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल को शराब नीति पर पुनर्विचार करने की  मांग पत्र दिया है। पत्र लिखा है कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित घोषित जिलों ब्लाको में परम्परागत पेय (कच्ची शराब) को आदिवासी रुढी और परंपरा को बचाए रखने के लिए उनके हित में संविधानिक दर्जा प्राप्त है।तब इन जिलों में अंग्रेजी एवं ठेके की शराब की नीलामी आक्सन क्यों की जा रही है। इसके ठेके तुरंत बंद कराए जायें। यदि ठेके से अंग्रेजी और ठेके की शराब का विक्रय नीलामी करना आवश्यक है तो अनुसूचित घोषित क्षेत्रों में स्थित नगर पालिका नगर पंचायत नगर परिषद क्षेत्रों में जहां पांचवी अनुसूची पेसा कानून लागू नही होता वही दुकानें खोली जाएं ताकि आदिवासी एवम् अन्य परम्परागत वन क्षेत्र के निवासी स्वयं की बनाई शराब का सेवन और विक्रय कर सके तथा शराब के व्यापारियों के शोषण से मुक्त हो जाये। गोंडवाना समग्र कांति आंदोलन ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष विधानसभा सचिवालय भोपाल को पत्र की प्रतिलिपि भेजी है।सनद रहे कि सरकार की नई आबकारी नीति के तहत ऐसे गांवों की आबादी 500 से कम है, वहां शराब के ठेके नहीं खुलेंगे। 500 से 5 हजार की आबादी वाली गांवों में एक तथा 5 हजार से अ​धिक आबादी वाले गांवों में 2 शराब के ठेके खोले जा सकते हैं। जिन गांवों में गुरुकुल होंगे, वहां पर शराब के ठेके नहीं खोले जाएंगे।  

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