मन से संविधान और अपने अधिकारों व विशेषाधिकारों की रक्षा और संरक्षण करें।
मन से संविधान और अपने अधिकारों व विशेषाधिकारों की रक्षा और संरक्षण करें।
बाबासाहेब ने सिर्फ़ एक समाज के बारे में नहीं, बल्कि पूरे भारतवासियों के बारे में सोचा और हमें संविधान दिया। इस संविधान के ज़रिए बाबासाहेब ने छोटे-बड़े, सभी की रक्षा का काम किया। बाबासाहेब ने जाति या धर्म नहीं देखा और यही बात प्रतिक्रियावादी लोगों, मनुवादियों को पसंद नहीं आई। बाबासाहेब ने लगभग तीन हज़ार सालों से गाँवों से बाहर रहे सामाजिक समूह को आरक्षण के ज़रिए मुख्यधारा में लाने का काम किया। भारत की आज़ादी को 75 साल हो गए हैं। इतने कम समय में ही मनुवादी लोग आरक्षण को नापसंद करने लगे हैं। तीन हज़ार सालों का बैकलॉग 75 सालों में कैसे पूरा हो सकता है? मनुवादी लोग आरक्षण पाने वालों की तरक्की देखकर सचमुच जल रहे हैं। आज भी हम अक्सर ऐसे लोगों को देखते हैं जिनकी मानसिकता होती है कि गाँव के बाहर के लोग उन्हें गुलाम बनाकर उनकी दया के बोझ तले जीवन व्यतीत करें। गांधीजी की हत्या के बाद, ब्राह्मणवादी लोग गाँव के बाहर के लोगों से सीधे टकराव से बचते रहे। ब्राह्मणवादी लोगों ने अपने अवैतनिक पैदल सैनिक बनाए। उन्होंने इन पैदल सैनिकों के दिमाग में हिंदुत्व नाम का कीड़ा डाल दिया और वही हिंदुत्व अन्य असहाय जातियों पर अत्याचार करने में गर्व महसूस करता है।बाबासाहेब पर क्या बीती होगी… जब बाबासाहेब ने संसद में हिंदू कोड बिल पेश किया, तो न सिर्फ़ कई मठों के मठाधीशों, संसद में सांसदों, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने हिंदू कोड बिल का विरोध किया, बल्कि समाज के जिस वर्ग, यानी महिलाओं के लिए बाबासाहेब ने हिंदू कोड बिल लिखा था, उसने भी इस हिंदू कोड बिल का विरोध किया। बाबासाहेब ने भारतीय महिलाओं पर अनगिनत उपकार किए हैं, वो उपकार हिंदू कोड बिल है। बाबासाहेब ने हिंदू कोड बिल के ज़रिए भारतीय महिलाओं को मातृत्व अवकाश, समान वेतन, समान अधिकार, उत्तराधिकार का अधिकार, महिला अधिकार, गोद लेने का अधिकार, तलाक का अधिकार, गुजारा भत्ता आदि जैसे अधिकार दिए हैं।बाबासाहेब पर क्या बीती होगी… जब बाबासाहेब ने संसद में हिंदू कोड बिल पेश किया, तो न सिर्फ़ कई मठों के मठाधीशों, संसद में सांसदों, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने हिंदू कोड बिल का विरोध किया, बल्कि समाज के जिस वर्ग, यानी महिलाओं के लिए बाबासाहेब ने हिंदू कोड बिल लिखा था, उसने भी इस हिंदू कोड बिल का विरोध किया। बाबासाहेब ने भारतीय महिलाओं पर अनगिनत उपकार किए हैं, वो उपकार हिंदू कोड बिल है। बाबासाहेब ने हिंदू कोड बिल के ज़रिए भारतीय महिलाओं को मातृत्व अवकाश, समान वेतन, समान अधिकार, उत्तराधिकार का अधिकार, महिला अधिकार, गोद लेने का अधिकार, तलाक का अधिकार, गुजारा भत्ता आदि जैसे अधिकार दिए हैं।मुद्दा यह है कि अगर आप महिला हैं या पुरुष, लेकिन मनुवादी लोगों की नज़र में आप पिछड़े हैं, तो आपको उनके पैर पकड़ने चाहिए। भारत में लगभग 6,447 या उससे अधिक जातियाँ हैं। मैं यह बात केवल एक हिंदू धर्म के संदर्भ में कह रहा हूँ। अन्य धर्मों की कहानी अलग है, उनमें भी जातियाँ हैं। फूट डालो और राज करो की अवधारणा को अंग्रेजों का माना जाता है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से गलत है। यह अवधारणा मनुवादी व्यवस्था द्वारा पहले से ही तैयार की गई है। यहाँ की मनुवादी व्यवस्था ने लोगों को जातियों में बाँटकर मलीदा खाने का काम किया है। युगों-युगों के इंतज़ार के बाद ज्ञान का सूर्य उदय होता है और क्रांति होती है, वह क्रांति बाबासाहेब का संविधान है। समय की माँग है कि हम पूरे मन से संविधान और अपने अधिकारों व विशेषाधिकारों की रक्षा और संरक्षण करें।
