समानता का समावेश राजनीतिक नौटंकी छलावा है.
समानता का समावेश राजनीतिक नौटंकी छलावा है
यूजीसी 2026कानून लागू होने की प्रक्रिया जैसी शुरू हुई हो हल्का वादविवाद लोगो की विरोध प्रतिक्रिया शूरु हो गई.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संसाधनों मे समानता को बढाने के लिए संबंधित विनियम2026पेश किया है. जिहका उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करना है. शिक्षा का क्षेत्र सम्मान और समानता का सशक्त साधन विकास का माध्यम होता है.यूजीसी द्वारा संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रमुख आकडो से पता चलता है कि देश भर के विश्वविद्यालय और कालेजों मे जाति आधारित भेदभाव शिकायतो मे पिछले पांच वर्षो मे 118.4% की वृद्धि हुई है. घटनाओ की संख्या 2019-20 मे 173 से बढकर 2023 मे 378 हो गई है. सामन्य वर्ग के लोगो का कहना है कि यूजीसी का नियम निष्पक्ष नही पक्षपातपुर्ण है एक विशेष वर्ग को प्रभावित करने फसाने वाली है. विश्वविद्यालय कालेजों मे इक्विटी सेल मे सामन्य लोगो की इन्ट्री क्यों नही. जातिगत भेदभाव अत्याचार की शिकायते का प्रमुख कारण साम्प्रदायिक हिंदु वर्ग ब्राह्मणवाद की सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखना है. संविधान के आर्टिकल 14 को मान्यता नही दी गई है. ब्राह्मणों की वर्ण जातिव्यवस्था का सिंधात जब तक देश मे रहेगा तब तक जाति वर्ण लिंक भेदभाव होता रहेगा. समानता का समावेश एक तरह से राजनीति नौटंकी छलवा है.एट्रोसिटी एक्ट लागू होने पर भी जातिवाद भेदभाव रुके नही है एट्रोसिटी की घटनाए घट रही जाति भेदभाव से प्रताडित से आत्म हत्या कर रहे है.आईपीएस अधिकारी रोहित वोमिला होनहार जैसा छात्र आत्महत्या कर रहा.
