लोकतंत्र के महापर्व पर मतदान करने जरुर जाये, लेकिन मतदान सोच समझ कर नैतिक मानवतावादी प्रत्याशी को वोटिंग करें।

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लोकतंत्र के महापर्व पर मतदान जरूर करने जाये लेकिन मतदान सोच समझ कर नैतिक मानवतावादी प्रत्याशी को वोटिंग करें।

लोकतंत्र के महापर्व पर मतदान करना नैतिक कर्तव्य है। क्योंकि यह समय पांच वर्ष में एक बार आता है मनपसंदीदा जनप्रतिनिधि चुना जाता है और संवैधानिक अधिकार से कार्य करता है। समाज मे कार्य नही करने वाले से डर नही होना चाहिए बल्कि आस्तीन के साप धोखेबाजो से सावधान रहना चाहिए। शिलवान नैतिकवान वैज्ञानिक मानवतावादी ईमानदारों की परख नही होने से चमचे, दलाल पिछलग्गूओ को ही वोटिंग कर जिताते आ रहे है। इस लिए रोजगार, महंगाई, और गरीबी जैसे गम्भीर मुद्दो पर प्राथमिकता गौण है। मानवतावादी वैज्ञानिक तार्किक दृष्टिकोण  स्वाभिमानी क्रांतिकारी विचारों वाले पर ही आशा रखी जा सकती है, ऐसे प्रत्याशी को वोटिंग जरुर करें।

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