
जल जंगल जमीन और अस्मिता के लिए संघर्ष ही आदिवासी दिवस है।
जल जंगल जमीन और अस्मिता के लिए संघर्ष ही आदिवासी दिवस है।
विश्व आदिवासी दिवस आदिवासीयों के अधिकार और उनकी सुरक्षा के लिए मनाया जाता है आदिवासी अक्दुसर दुर दराज क्षेत्र ग्रामीणों इलाकों में रहते हैं जहां आवागमन परेशानीया नदी नालों को पार करना दुर्भर है आदिवासी क्षेत्रों में स्कुल व्यवस्था जर्जर ठीक नही है स्वास्थ्य सेवा ठीक नही है शिक्षा और स्वास्थ्य के अभाव जी रहे है आदिवासी गरीबी बेकारी,साहुकार के दास बने शोषण का शिकार है। सरकारें हितों के कल्याण की जगह हिन्दू वनवासी बनाने का काम कर रही है। आदिवासी समुदाय के लिए उत्सव का दिवस नही होना चाहिए बल्कि जल जंगल जमीन और अस्मिता पर विचार होना चाहिए, क्योंकि आदिवासीयों के साथ अन्याय अत्याचार भेदभाव शोषण की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। प्राकृतिक और पर्यावरण की रक्षा आदिवासी होता है संविधान में स्वशासन का अधिकार है। लेकिन गुलाम बनाया हुआ। विकास परियोजना के नाम पर इनकी पेतृक जमीन अधिग्रहण कर विस्थापित किया जाता है भुमी का दोहन खनन तश्करी का व्यापार खुलेआम चल रहा है।धरती आबा महान स्वतंत्रता सेनानी जननायक बिरसा मुंडा का 9अगस्त को जन्म दिवस भी है आदिवासी समुदाय को उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए।उन्होंने हमें सिखाया धरती, जंगल और जल सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता हैं। उनकी प्रेरणा सेएकता, स्वाभिमान और न्याय के रास्ते पर चलने का संकल्प लें।”धरती आबा बिरसा मुंडा ने हमें सिखाया,जमीन और अधिकार के लिए डटकर लड़ना ही सच्चा साहस है।और अन्याय के खिलाफ हमेशा आवाज़ उठाएंगे।””बिरसा मुंडा सिर्फ एक योद्धा नहीं,एक विचार है हमें सिखाते हैं कि स्वाभिमान और आज़ादी से बड़ा कोई धर्म नहीं।””धरती की रक्षा, समाज की एकता औरअन्याय के खिलाफ संघर्ष—यही है बिरसा मुंडा का असली संदेश।