*अन्य राज्यों से आकर मध्यप्रदेश में स्थाई हुये दलित/आदिवासी/पिछड़े वर्ग के लोगों का आरक्षण समाप्त के खिलाफ होंगा आंदोलन*

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*अन्य राज्यों से आकर मध्यप्रदेश में स्थाई हुये दलित/आदिवासी/पिछड़े वर्ग के लोगों का आरक्षण समाप्त के खिलाफ होंगा आंदोलन*


भोपाल : 04/01/26 :  दलित आदिवासी वंचित फोरम के चेयरमैन *डा मोहनलाल पाटील* की उपस्थिति आरक्षित वर्ग के नेताओं की एक बैठक, तुलसी नगर, भोपाल में संपन्न हुई। बैठक में अन्य राज्यों से आये परिवार मध्यप्रदेश के मुल निवासी बनने के बावजूद *जाती प्रमाण पत्र के लिए 73 वर्ष का रिकार्ड मांगा जाने* व *आरक्षण सुविधाओं से वंचित रखने* के षड्यंत्रों पर चिंता व्यक्त की गई।

इस सम्बन्ध में जानकारी यह है कि *मध्यप्रदेश की स्थापना 01 नवम्बर 1956 को हूई तो नागपुर की राजधानी भोपाल आई*, सभी विभागों के कर्मचारी नौकरी करने भोपाल आये, केन्द्रीय कार्यालय के कर्मचारी, मजदुरी करने मजदुर आये।  लेकिन *जाती प्रमाण पत्र प्राप्त करने अनुसुचित जाती/जनजाति के लोगों को वर्ष -1950 का राजस्व रिकार्ड* मांगा जाता है और *पिछड़े वर्ग को वर्ष 1994 का रिकार्ड* मांगा जाता है। नही होने बच्चों को आरक्षित कोटे में स्कूल/ कॉलेज में *एडमिशन नही मिलता, स्कालरशिप नही मिलती* और  आरक्षित कोटे से *मध्यप्रदेश में नौकरी नही मिलती* । आरक्षित सीटों पर *चुनाव में खड़े नही हो सकते* है। मुल राज्यों से प्रमाण पत्र बनाकर लाने को कहते है, उसके आधार पर सुविधाएं मागंते तो यहा मिलेंगी, उसी राज्य में मिलेंगी कहते, मुल राज्य में शिक्षा ग्रहण नही करने पर वह राज्य भी सुविधा देने से मना करते है। जब की *राज्य के मुलनिवासी बनने के लिए 15 वर्ष का स्थाई निवास, प्रदेश में अचल संपत्ति एवं जन्म प्रमाण पत्र देने से होता है*। आरक्षित लोग मुल निवासी होने का दावा नही करे इसलिए वर्तमान में *मुलनिवासी प्रमाण पत्र देना बंद कर स्थानिक निवास प्रमाण पत्र प्रदान दिया जाता  है*। मध्यप्रदेश में *प्रमाण पत्र से वंचित आरक्षित वर्ग के 20 लाख परिवार है*। अन्य राज्यों की सुची में जो जातीया आती आरक्षित वर्ग में आती है , वह *मध्यप्रदेश की सुची में आती है, उनके लिए ही आरक्षण मांगा जा रहा है*।

      इस सम्बन्ध में भारत सरकार, मध्यप्रदेश सरकार तथा कोर्ट में जाने के बावजूद आरक्षित वर्ग के लोगों को न्याय नही मिल रहा है। इस सम्बन्ध में आरक्षित वर्ग के नेताओं की बैठक संपन्न हुई। बैठक में *मध्यप्रदेश के मुल निवासी बनने के बावजूद आरक्षण के लाभ से वंचित लोगों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया गया*। बैठक में सर्वश्री सुनिल बोरसे, रामु गजभिए, उदभान चवरे, एन पी अहिरवार, विजय कुमार, वामन जंजाले, सिद्धार्थ मोरे, अशोक वंजारी, आनंद जमदाडे, हरिनारायण अहिरवार, दिलिप बागडे, महादेव डोंगरे, राहुल मेश्राम, शंकर बागुल, जितेन रंगारी, पुरुषोत्तम वंजारी, अरुण बन्सोड, सुमडु जवरस उपस्थिति थे।

आरक्षण सुविधाओं से वंचित लोगों को *संगठित करने* का भी  निर्णय लिया गया है।*

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