युवा शक्ति समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है राष्ट्र निर्माण और आत्मसम्मान के लिए 12जनवरी स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है जिनको 1894मे शिकागो में धर्म सम्मेलन में व्याखान के लिए शंकाराचार्य ने अधिकृत नहीं किया था। बौद्ध भिक्षु अनागारिक धम्म पाल ने व्याख्यान का मौका दिया था।

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युवा शक्ति समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है  राष्ट्र निर्माण और आत्मसम्मान के लिए 12जनवरी स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद को शंकराचार्य ने व्याख्यान के लिए अधिकृत नहीं किया था। बौद्ध भिक्षु अनागारिक धम्म पाल ने व्याख्यान का मौका दिया था।

प्रति वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। युवा शक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। युवा को राष्ट्र को निर्माण के प्रति जागरूक और आत्मसम्मान के लिए भारत सरकार ने उनकी जंयती को राष्ट्र दिवस के रूप में मनाने की घोषणा 19 वी सदी में 1984 में हुई। यहां उल्लेखनीय है कि 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद को शंकराचार्य ने शुद्र कहते हुए वैदिक धर्म वेद और वेदान्त पर व्याख्यान देने से मना कर दिया था।तब श्रीलंका के विद्वान महान भिक्षु अनागारिक धम्म पाल ने अपने समय से 5 मिनट का समय स्वामी विवेकानंद को धर्म सम्मेलन में बोलने का मौका दिया गया था। विवेकानंद ने भारत की प्राचीन सभ्यता और बौद्ध दार्शनिक नागार्जुन के शुन्यवाद पर जोर दिया था। हिंदू धर्म और भारतीय दर्शन का प्रतिनिधित्व किया, बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर अपने विचार रखे और बौद्ध धर्म ही हिन्दू धर्म की परिपूर्णता का उल्लेख किया।जीवन के अंत में स्वामी विवेकानंद ने बौद्ध धर्म को अपनाया था।

 

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