9जनवरी भारत की पहली मुस्लिम शिक्षिका सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले की सहयोगी फातिमा शेख की जयंती शत् शत् नमन

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9जनवरी भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले की सहयोगी फातिमा शेख से की जयंती  शत-शत नमन वंदन

इनका जन्म 9 जनवरी 1831 को पुणे के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके भाई का नाम उस्मान शेख था, फातिमा शेख 19वीं सदी की भारतीय  शिक्षाविद और समाज सुधारक थी जो समाज सुधारको में ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की सहयोगिकी थी जो ज्योतिबा फुले के मित्र थे।  दोनों भाई-बहन सावित्रीबाई फुले से मिले। उनके के साथ मिलकर फातिमा शेख ने दलित और मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।कई लोगों ने विरोध भी किया फातिमा शेख ने अहमदनगर के एक मिशनरी स्कूल में टीचर्स ट्रेनिंग भी ली थी। इसके बाद सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख ये दोनों लोगों के बीच जाकर महिलाओं और बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया करती थी। इस दौरान अधिकांशतः लोग उनके इस कार्य का विरोध भी कर रहे थे, लेकिन विपरीत परिस्थितियों और कठिनाईयों का सामना करते हुए दोनों ने इस अभियान को जारी रखा। सन् 1856 में सावित्रीबाई फुले जब बीमार पड़ गई तो वह कुछ दिन के लिए अपने पिता के घर चली गईं। उस समय अकेले फातिमा शेख ही सारा लेखा जोखा देखती थी।उस समय जब हमारे पास संसाधनों की बहुत ही कमी थी तब फातिमा शेख ने मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा को लेकर आवाज उठाई। हालांकि, ये सब करना आसान नहीं था लेकिन फातिमा शेख ने ये कर दिखाया। फातिमा शेख घर-घर जाकर दलितों और मुस्लिम महिलाओं को स्वदेशी पुस्तकालय में पढ़ने के लिए आमंत्रित किया करती थी। इस दौरान उन्हें कई प्रभुत्वशाली वर्गों के भारी प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ा। लेकिन अपनी बात पर अड़ी फातिमा शेख ने कभी हार नहीं मानी। आज संपूर्ण भारत की सभी महिलाओ को राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले और माता फतिमा शेख की ऋणी होना चाहिए।

 

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