राजश्री छत्रपतिशाहु जी महाराज की जयंती तिशाहु जी महाराज की जयंती
राजर्षीछत्रपतिशाहु जी महाराज की जयंती
राजर्षिछराजर्षि छत्रपति शाहू महाराज को भारत में “आरक्षण) और एक महान सामाजिक सुधारक माना जाता है। उन्होंने कोल्हापुर रियासत के राजा रहते हुए दबे-कुचले, बहुजन और वंचित समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाये
राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज को भारत में “आरक्षण) और एक महान सामाजिक सुधारक माना जाता है। उन्होंने कोल्हापुर रियासत के राजा रहते हुए दबे-कुचले, बहुजन और वंचित समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाए,
राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज को भारत में “आरक्षण) और एक महान सामाजिक सुधारक माना जाता है। उन्होंने कोल्हापुर रियासत के राजा रहते हुए दबे-कुचले, बहुजन और वंचित समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाए
, उनके कारण ही आज उन्हें सम्मान से याद किया जाता है।
शाहू महाराज ने शिवाजी महाराज के सपनों का भारत बनाने के लिए, 26 जुलाई 1902 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी कर कोल्हापुर के प्रशासन में पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए 50% आरक्षण लागू किया था। यह आधुनिक भारत के इतिहास में नौकरियों और प्रशासन में समाज के पिछड़े तबके को अवसर देने वाला पहला आधिकारिक फैसला था। उनका स्पष्ट मानना था कि जब तक राज्य के प्रशासन और सत्ता में समाज के सभी वर्गों (विशेषकर बहुजन समाज) की हिस्सेदारी नहीं होगी, तब तक सच्ची समानता और लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो सकती। उन्होंने योग्य और शिक्षित बहुजन युवाओं को सीधे ऊंचे पदों पर नियुक्त किया।
शाहू महाराज ने केवल सत्ता नहीं चलाई, बल्कि समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता, जातिवाद और अशिक्षा के खिलाफ एक युद्ध छेड़ा। उन्होंने अपनी रियासत में प्राथमिक शिक्षा को सभी के लिए मुफ्त और अनिवार्य (Compulsory) बना दिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही अज्ञानता और गुलामी की बेड़ियों को काट सकती है। उन्होंने गरीब और पिछड़े गांवों के बच्चे शहरों में आकर पढ़ सकें, इसके लिए उन्होंने कोल्हापुर में विभिन्न जातियों और समुदायों (जैसे मराठा, जैन, लिंगायत, मुस्लिम, महार आदि) के लिए छात्रावास बनवाए।
डॉ. बी.आर. आंबेडकर का ऐतिहासिक समर्थन किया। शाहू महाराज ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की बुद्धिमत्ता और नेतृत्व क्षमता को बहुत पहले पहचान लिया था। उन्होंने बाबासाहेब की उच्च शिक्षा और उनके ‘मूकनायक’ समाचार पत्र की शुरुआत के लिए बड़ी वित्तीय सहायता दी। 1920 के मानगांव परिषद में शाहू महाराज ने दलित समाज से कहा था कि, “आपको डॉ. आंबेडकर के रूप में अपना सच्चा नेता मिल गया है।”
उन्होंने देवदासी प्रथा, जोगतिन प्रथा और बंधुआ मजदूरी जैसी सामाजिक कुप्रथाओं को कानूनी रूप से प्रतिबंधित किया। इसके अलावा, उन्होंने अंतरजातीय और अंतर्जातीय विवाहों को कानूनी मान्यता दी और विधवा विवाह का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने सार्वजनिक कुओं, तालाबों, सराय और स्कूलों को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए खोल दिया। वे स्वयं दलित और वंचित समाज के लोगों के साथ उठते-बैठते और भोजन करते थे ताकि समाज से छुआछूत का भेदभाव मिटाया जा सके।
राजर्षि शाहू महाराज का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि सत्ता में बैठा व्यक्ति संवेदनशील और दूरदर्शी हो, तो वह पूरे समाज की तकदीर बदल सकता है। उन्होंने जो आरक्षण और सामाजिक समता की नींव 1902 में रखी, वही आगे चलकर स्वतंत्र भारत के संविधान का एक मुख्य आधार बनी
