महाबोधी महाविहार बौद्ध गया मुक्ति बुद्ध पूर्णिमा के बाद विशाल आंदोलन होगा ॽ

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महाबोधी महाविहार बौद्ध गया मुक्ति बुद्ध पूर्णिमा के बाद होगा विशाल आंदोलन होगा ॽ

महाबोधी महाविहार बौद्ध गया  मुक्ति का अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन को 50 दीन हो गये है लेकिन बिहार राज्य और केंद्र सरकार के कानों जु तक नही रेंगी है बौद्ध गया तथागत भगवान गौतम बुद्ध के ज्ञान का  स्थान बौद्धो का पवित्र स्थान, विश्व धरोहर पर्यटन स्थान है। देश विदेश के पर्यटक और बौद्धिष्ट तथागत भगवान बुद्ध को श्रद्धा से अभिवादन करने आते है और वहां ब्राह्मणों पुजारियों द्वारा पिंडदान श्राद्ध जैसे अंधविश्वासी कर्मकांड किये जाते है, वर्षों से महाविहार महाबोधि बौद्ध गया ब्राह्मणों के कब्जे में है । संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार के तहत बौद्ध गया का मंदिर बौद्धौ के अधिनस्थ जायज होने पर भी नजरांदाज किये हुए है। लेकिन बौद्धों के लिए आंदोलन प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।आर्यावर्त ब्राह्मण भारत को अपना जन्म स्थान तथागत गौतम बुद्ध को विष्णु का अवतार कहकर अपना वर्चस्व कायम रखना चाहता है। आर्यावर्त ब्राह्मण राष्ट्र कल्पनाएं बनाये हुए है। धीरे धीरे  हिन्दु मुस्लिम का साम्प्रदायिक वातावरण में देश को भगवा रंग रंगा जा रहा है। आर्यावर्त ब्राह्मण समाज विचारधारा के षंड़यंत्रकारी देश का मुल बहुजन एससी एसटी ओबीसी पुरी तरह से फस गया है।महाबोधि मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम के प्रमुख नेता आकाश लामा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगर बिहार सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो बुद्ध पूर्णिमा तक प्रतीक्षा की जाएगी। उसके बाद देश के कोने-कोने से 1 करोड़ बौद्ध बोधगया में एकत्र होंगे और एक विशाल आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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