प्रदीपन संस्था ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में 16 संभावित बाल विवाह को रोका —

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प्रदीपन संस्था ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में 16 संभावित बाल विवाह को रोका

बैतूल। प्रदीपन संस्था द्वारा 22 अप्रैल से 30 अप्रैल तक अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर बाल विवाह मुक्त भारत और जिला बनाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसके माध्यम से 16 संभावित बाल विवाह रोके गए। संस्था के सदस्यों ने बालिकाओं के पालकों को समझाइश देकर उन्हें बाल विवाह को रोकने में सफलता प्राप्त की।
प्रदीपन संस्था की संचालिका रेखा गुजरे ने बताया कि इस अभियान के तहत संस्था के कार्यकर्ताओं ने बैतूल जिले के 50 गांवों में जाकर जन समुदाय, महिला संगठनों, स्कूलों, बच्चों से आम सभाओं, बैठकों, रोल प्ले और दीवार लेखन के माध्यम से संवाद किया। इन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों, इसके कानूनी अपराध होने तथा सामाजिक अभिशाप होने के बारे में जानकारी दी गई। अभियान के माध्यम से 16 संभावित बाल विवाह रोके गए। 
—धर्मगुरुओं ने भी संभाली थी कमान—
अभियान का समापन अक्षय तृतीया के दिन जिले के विभिन्न धर्मगुरुओं के सहयोग से हुआ। संस्था के कार्यकर्ता मंदिर, मस्जिद, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचे और धर्मगुरुओं से बाल विवाह के विरोध में समर्थन संदेश दिलवाए। इस अवसर पर फादर जोजो डॉन बास्को, रेव. सिनियार्ड ईएलसी कोठी बाजार, जैन धर्म के मुनि, इमाम जुनैद अहमद जामा मस्जिद, गायत्री शक्तिपीठ के पुजारी श्री लखन बिरेन्द्र, तथा बौद्ध धर्म की अनुयायी मीना पाटिल ने बाल विवाह को रोकने का आह्वान किया। धर्मगुरुओं ने संयुक्त रूप से कहा कि कोई भी धर्म या भारत का संविधान बाल विवाह की अनुमति नहीं देता। बाल विवाह से बच्चों का शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास प्रभावित होता है। यह समाज की उन्नति में बाधक है और एक कानूनी अपराध भी है। उन्होंने अपील की कि लड़कियों की शादी 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष की उम्र पूरी होने पर ही की जाए।
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