पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज अपराधिक रेकार्ड के आधार पर अधिमान्यता निरस्त नही होगीॽ जबलपुर हाईकोर्ट ने माना कि नैसगिक न्याय के सिद्वांत का पालन नहीं हो पाया

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पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज अपराधिक रेकार्ड के आधार पर अधिमान्यता निरस्त नही होगीॽ

जबलपुर हाईकोर्ट ने माना कि नैसगिक न्याय के  सिद्वांत   का पालन नहीं हो पाया

बैतूल जिले के 60 वर्षिय नि:शक्त पत्रकार रामकिशोर पंवार की याचिका पर आया फैसला

बैतूल। मध्यप्रदेश प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की एकल पीठ ने मध्यप्रदेश सरकार के जन संपर्क विभाग के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया जिसमें बैतूल जिले के 60 वर्षिय नि:शक्त पत्रकार रामकिशोर पंवार पर दर्ज अपराधिक मामलो को लेकर उनकी अधिमान्यता समाप्त की थी। उच्च न्यायालय में बैतूल जिले के 60 वर्षिय नि:शक्त पत्रकार रामकिशोर दयाराम पंवार की ओर से दायर की गई एक याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विशाल धगत ने दिनांक 15 अक्टुबर 2024 को वरिष्ठ अतिरिक्त संचालक अधिमान्यता जनसंपर्क संचनालय भोपाल का पत्रकार रामकिशोर पवार की अधिमान्यता समाप्त करने का फैसला हाईकोर्ट ने किया निरस्त कर दिया। जबलपुर उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में पत्रकार की अधिमान्यता समाप्त करने के मामले में  नैसर्गिक न्याय के सिद्वांत   का पालन न करने पर  बैतूल के वरिष्ठ पत्रकार रामकिशोर पवार को बड़ी राहत दी है। पत्रकार रामकिशोर पवार के अधिवक्ता सुशील तिवारी ने बताया कि न्यायाधीश ने अपने फैसले में उल्लेख किया है कि अपर संचालक अधिमान्यता द्वारा जारी आदेश को देखने पर पाया गया कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया। आदेश एक नान स्पीकिंग आर्डर है और इसमें केवल क्लाज 8(3) का उल्लेख है और याचिकाकर्ता की मान्यता रद्द कर दी गई थी। उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त संचालक जनसंपर्क को भी निर्देश दिए हैं कि वे कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर दिया जाए। ज्ञात हो कि वरिष्ठ पत्रकार रामकिशोर पवार को लेकर पुलिस अधीक्षक बैतूल के प्रतिवेदन और कलेक्टर बैतूल की अनुशंसा के आधार पर पत्रकार रामकिशोर पवार की अधिमान्यता जनसंपर्क भोपाल ने रद्द कर दी थी। इस मामले में रामकिशोर पवार ने हाईकोर्ट की शरण ली थी और जनसंपर्क के अधिमान्यता रद्द करने के फैसले को गैरवाजिब नियम विरूद्व और नैसर्गिक न्याय के सिद्वांत के विरूद्व बताया था। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद कानून के जानकार कहते है कि भविष्य में अब मध्यप्रदेश में किसी भी पत्रकार के खिलाफ  एफ  आई आर दर्ज होने या उसके अपराधिक रिकार्ड के आधार पर अधिमान्यता निरस्त करने से पूर्व उसे कारण बताओ नोटिस जारी करके नैसगिक न्याय के सिद्वंात का पालन कर उसका भी पक्ष जानना होगा। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद भविष्य में किसी भी पत्रकार के खिलाफ  सीधी एक पक्षीय कार्रवाई नहीं की जा सकेगी तथा अब पत्रकार की अधिमान्यता समाप्त करने से पूर्व पत्रकार का पक्ष जानना जरूरी हो गया है।

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