बगैर पेकिंग कम तिली की माचिस, 1लिटर की जगह 80-90 ग्राम का प्लास्टिक पाउच खाद्य तेल की खुलेआम धोका बिक्री उपभोक्ताओं के साथ लुट

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बगैर पेकिंग कम तिली की माचिस, 1लिटर की जगह 80-90 ग्राम का प्लास्टिक पाउच खाद्य तेल की खुलेआम धोका बिक्री उपभोक्ताओं के साथ लुट

माचिस अंधेरे में उजाला देने का काम करती है। माचिस अमीर हो या गरीब सभी उपयोग करते हैं। मोमबत्ती,अगरबत्ती, कपुर, दिया की बाती,बीड़ी, सिगरेट जलाने का आता है।हर घर की आवश्क जरुरी वस्तु बनी हुई है। कमल छाप माचिस उपभोक्ताओं की पसंदीदा विश्वनीय माचिस रही हैं। माचिस की डिब्बी या पेकेट पर लाल रंग फास्फोरस के अलावा कांच का चुरा तथा रेत का उपयोग होता है। माचिस की तिल्ली पोटेशियम क्लोराइड बनती है।हर घर में उपयोग में आने वाली माचिस चार दसक पुर्व जो पच्चीस में मिलती रही थी। मंहगाई बढ़ने के साथ चौगुना किमत में मिलने लगी। माचिस पेकिंग में मिलती रही है। अब बिना पेकिंग की कम तिली की खुरदरा किराना दुकानों में मिल रही है। खुरदरा किराना व्यापारी कहते कि बगैर पेकिंग की  माचिसें मिल रही है हम क्या कर सकते है। वहीं पर पर्यावरण के नाम पर प्लास्टिक पन्नी पर प्रतिबंध लगाया गया है परन्तु रिपफाइन खाद्य तेल 1लिटर की जगह 80-90 ग्राम पन्नी पाउच खुदरा दुकानदार बाजार में खुलेआम बेचा जा रहा है। उपभोक्ताओं को सीधा सीधा धोका देकर लुटा जा रहा है।

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