भाजपा आरएसएस प्रतिक्रिया मनुवादी के लोगो का संविधान डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब ने नहीं लिखा बयान दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक,अपमान, भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

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भाजपा आरएसएस प्रतिक्रिया मनुवादी के लोगो का संविधान डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब ने नहीं लिखा बयान दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक,अपमान, भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

संविधान समानता बंधुत्व का आधार है, संविधान अनुसार पहले और अंत में भी भारतीय है। डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब के प्रति विषमतावादी भाजपा और आरएसएस प्रतिक्रिया मनुवादी के लोगो का इन दिनों बयान बाजी हो रही है कि संविधान डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब ने नही लिखा, बीएन राव ने लिखा है बयान दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक है। संविधान निर्माण में डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब का योगदान अपमान है एससी एसटी ओबीसी वंचित दलित पिछड़े अल्पसंख्यक बहुजन समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के प्रति ईर्ष्या है, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नाम के योगदान नाम को खत्म करने का षंडयंत्र है। इतिहास में उल्लेख है कि बीएन राव संविधान सभा के चुने हुए सदस्य नहीं वेतन लेने वाला संविधानिक सलाहकार मनोनीत व्यक्ति थे,जिनकी नियुक्ति संविधान का मसौदा तैयार करने लिए 1946 को हुई थी।जिन्होंने संविधान सभा का प्राथमिक कच्चा मसौदा तैयार कर दिया था। संविधान निर्माण के लिए 2 वर्ष 11 महिने 17 दिन लगे थे। ड्रापटिंग कमेटी में डाॅ बाबा साहेब आंबेडकर अध्यक्ष,अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर, जन-जन गोपाल स्वामी अय्यर, के एम मुंशी मोहम्मद साहुल्लाह,एन माधवराव (बीएल मित्तर की जगह), टी टी कृष्णामचारी (डी पी खेतान की जगह) बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान एक विशेष दलित वंचित समाज के लिए नही लिखा है,सभी धर्म जातियों समाज के लिए लिखा है। बाबा साहेब ने संविधान ही नही दिया बल्कि सामाजिक समानता स्वतंत्रता न्याय का अधिकार लोकतंत्र दिया है। प्रतिक्रिया मनुवादी द्वारा संविधान लिखा होता तो संसद में हिन्दु कोड बिल नही आता। बाबा साहेब आंबेडकर ने महिलाओं पर अनगिनत उपकार किए हैं महिलाओं को मातृत्व अवकाश, समान काम, समान वेतन,गोद लेने का रक्षा का अधिकार दिया है।

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