ब्राह्मणी मनुवादीयो की सामाजिक व्यवस्था के त्यौहारो को मनाना अपने महान महापुरुषों के हत्याओं का जश्न – 22 प्रतिज्ञा को न मानना उद्धारकर्ता के साथ बईमानी और अपमान है।

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ब्राह्मणी मनुवादीयो की सामाजिक व्यवस्था के त्यौहारो को मनाना अपने महान महापुरुषों के हत्याओं का जश्न – 22 प्रतिज्ञा को न मानना उद्धारकर्ता के साथ बईमानी और अपमान है।

परम पूज्यनीय बाबा साहेब आंबेडकर ने जाति अमनुवाद से मुक्ति के लिए असमान्यता वाले धर्म का त्याग किया, समानतावादी बौद्ध धर्म को ग्रहण कर धर्मांतरण का रास्ता अपनाया। स्वतंत्रता समानता और स्वाभिमान से जीने के लिए बौद्ध धर्म के लिए प्रेरित किया। जाति वर्ण वर्ग व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय उसी असमानता वादी जातिवर्ण व्यवस्था शासन मजबूत करने के लिए  तीज त्यौहारो मनाने के लिए दलित बहुजन आम्साबेडकरी प्रेरित हो रहें है ? डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब ने 22 प्रतिज्ञा दी है, अगर हम उस 22 प्रतिज्ञा का पालन नही करते है तो स्पष्ट है कि हम अपने उद्धारकर्ता के साथ बईमानी और अपमान करते है।उनका उपयोग स्वार्थ के लिए करते है। घर में दिया जलाकर अंधेरे को दूर करते है लेकिन जो मन में अंधेरा है उसका क्या? जब तक मन में अंधेरा रहेगा तो बाहर कितना भी उजाला करो, दीपक जलाओ खुब दिखावा करो कुछ होने वाला नही है। दिपक जलाना, उजाला करना दिखावा अज्ञानता का परिचायक है।जब तक मन में अज्ञान अंधेरा रहेगा तब तक बाहर दिया जलाना व्यर्थ है। कार्तिक अमावस्या इसी दिपावली के समय भगवान बुद्ध धम्म संघ महत्वपूर्ण उप सेना नायक भिक्षु महामोग्यलायन की इसगल पर्वत पर बेहरमी से हत्या हुई थी।मोर्य काल के दसवें बौद्ध राजा की भी सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने सम्राट ब्रहद्रथ की धोके से हत्या की थी, बहुजनो के शक्तिशाली बाहदुर बुद्धिमानी उदारवादी दयावान परोपकारी राजा बाली की भी हत्या कार्तिक अमावस्या के समय में ही हुई थी। ब्राह्मणी मनुवादीयो की सामाजिक व्यवस्था के त्यौहारो को मनाना अपने महान महापुरुषों के हत्याओं का जश्न मनाने जैसा है।

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