हिरासत में पिता पुत्र की मौत नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
हिरासत में पिता पुत्र की मौत नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
तमिलनाडु की एक अदालत ने पुलिस हिरासत में पिता–पुत्र की मौत के मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है। यह घटना कोरोना काल के दौरान हुई थी, जब कथित रूप से लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में दोनों को हिरासत में लिया गया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जिन लोगों पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी है, यदि वही कानून तोड़ते हैं तो यह समाज के लिए अत्यंत गंभीर और झकझोर देने वाला अपराध है। न्यायालय ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी है। हिरासत में होने वाला उत्पीड़न कानून के शासन पर सीधा आघात है। जब आम नागरिक यह महसूस करने लगें कि सुरक्षा देने वाली व्यवस्था ही असुरक्षा का कारण बन सकती है, तब न्यायिक हस्तक्षेप समाज में विश्वास बहाल करने का माध्यम बनता है।
ऐसे फैसले यह संदेश देते हैं कि वर्दी कानून से ऊपर नहीं है। मानव गरिमा और जीवन का अधिकार सर्वोपरि है, और उसका उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
