दादी का आशीर्वाद एक दादी और पोते के निश्छल प्रेम की भावनात्मक कहानी

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दादी का आशीर्वाद “

एक दादी और पोते के निश्छल प्रेम की भावनात्मक कहानी

लेखक निर्मल दास मानकर मो. न.73540899988

सुबह का समय था। आँगन में हल्की-हल्की धूप बिखरी हुई थी। फूलों की क्यारी में गुलाबी फूल खिले थे। ठंडी हवा के झोंके वातावरण को खुशनुमा बना रहे थे। घर के आँगन में एक छोटा-सा बच्चा घुटनों के बल बैठा मुस्कुरा रहा था। उसके चेहरे पर मासूमियत थी और आँखों में अनगिनत सपने।
पास ही उसकी दादी खड़ी थीं। उम्र ने उनके शरीर को थोड़ा झुका दिया था। चेहरे पर झुर्रियाँ थीं, लेकिन आँखों में अपने पोते के लिए अथाह स्नेह भरा हुआ था। कंधों पर शॉल ओढ़े दादी अपने पोते को बड़े प्यार से निहार रही थीं।
बच्चे ने दादी की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “दादी, आप मेरे साथ खेलोगी?”
दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “बेटा, अब मेरे घुटनों में पहले जैसी ताकत नहीं रही। तुम खेलो, मैं तुम्हें देखती रहूँगी।”
बच्चा तुरंत उनके पास आया और उनका हाथ पकड़कर बोला, “दादी, जब मैं छोटा था तब आप मुझे गोद में उठाती थीं। अब मैं बड़ा हो रहा हूँ। एक दिन मैं आपको गोद में उठाऊँगा।”
बच्चे की बात सुनकर दादी की आँखें नम हो गईं। उन्होंने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटा, मुझे गोद में उठाने की जरूरत नहीं है। बस जीवन में इतना बड़ा इंसान बनना कि किसी बुजुर्ग को सहारे की जरूरत पड़े तो तुम उसका हाथ थाम सको।”
बच्चे ने मासूमियत से पूछा, “दादी, क्या सभी बुजुर्गों के पास उनके पोते-पोतियाँ होते हैं?”
दादी कुछ क्षण चुप रहीं। फिर बोलीं, “नहीं बेटा, कुछ बुजुर्ग ऐसे भी होते हैं जिनके बच्चे उनसे दूर चले जाते हैं। कुछ के बच्चे होते हुए भी वे अकेले रह जाते हैं। उन्हें किसी महँगी चीज की जरूरत नहीं होती, बस दो मीठे बोल और थोड़ा-सा अपनापन चाहिए।”
बच्चा कुछ सोचने लगा।
उसने दादी का हाथ पकड़कर कहा, “दादी, आप कभी अकेली मत होना। मैं हमेशा आपके साथ रहूँगा।”
दादी ने उसे अपने सीने से लगा लिया।
### समय का पहिया
दिन बीतते गए। बच्चा स्कूल जाने लगा। दादी रोज सुबह उसे तैयार करतीं, उसके बाल सँवारतीं और टिफिन हाथ में देकर दरवाजे तक छोड़ने आतीं।
जब बच्चा स्कूल से लौटता तो सबसे पहले दादी को ढूँढ़ता।
“दादी! मैं आ गया!”
दादी रसोई से आवाज देतीं, “आ जा बेटा, तेरे लिए खाना तैयार है।”
वह अपने स्कूल की हर छोटी-बड़ी बात दादी को सुनाता। कभी शिक्षक की शिकायत करता, कभी दोस्तों के साथ हुई शरारत बताता और कभी अपनी परीक्षा के अच्छे नंबरों की खुशी साझा करता।
दादी उसकी बातें सुनकर ऐसे खुश होतीं जैसे उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी दौलत मिल गई हो।
एक दिन स्कूल में शिक्षक ने बच्चों से पूछा, “तुम्हारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति कौन है?”
किसी ने पिता का नाम लिया, किसी ने माता का और किसी ने अपने मित्र का।
जब उस बच्चे की बारी आई तो उसने कहा, “मेरी दादी!”
शिक्षक ने पूछा, “तुम्हारी दादी तुम्हारे लिए इतनी खास क्यों हैं?”
बच्चे ने उत्तर दिया, “क्योंकि मेरी दादी मुझे तब भी प्यार करती हैं जब मैं गलती करता हूँ। वे मुझे डाँटती भी हैं, लेकिन कभी मेरा साथ नहीं छोड़तीं।”
शिक्षक कुछ पल शांत रहे। फिर बोले, “बच्चो, जीवन में माता-पिता और दादा-दादी का सम्मान करना सीखो। उनके अनुभव हमारी सबसे बड़ी पूँजी हैं।”
### दादी की अधूरी इच्छा
एक दिन दादी की तबीयत खराब हो गई। वे पहले की तरह आँगन में नहीं निकल पा रही थीं। पोता स्कूल से आया तो उसने देखा कि दादी चारपाई पर लेटी हुई हैं।
उसने पूछा, “दादी, आज आप फूलों को पानी देने नहीं गईं?”
दादी बोलीं, “बेटा, आज थोड़ी थकान है।”
बच्चा तुरंत पानी का गिलास लेकर आया और दादी को पानी पिलाया। फिर उनके पास बैठकर बोला, “दादी, अब आप आराम कीजिए। आज मैं आपके फूलों को पानी दूँगा।”
दादी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
उस दिन बच्चे ने पहली बार महसूस किया कि जिस दादी ने बचपन में उसकी हर जरूरत पूरी की, अब उनकी देखभाल करना उसकी जिम्मेदारी है।
उसने दादी के पैरों में तेल लगाया और उनके पास बैठकर कहानी सुनाने लगा।
दादी मुस्कुराकर बोलीं, “बेटा, आज तू मुझे कहानी सुना रहा है। लगता है मेरा बच्चा बड़ा हो गया।”
बच्चे ने कहा, “दादी, मैं बड़ा जरूर हो जाऊँगा, लेकिन आपके लिए हमेशा छोटा ही रहूँगा।”
### रिश्तों की असली संपत्ति
कुछ वर्षों बाद वही बच्चा पढ़-लिखकर एक समझदार युवक बन गया। जीवन में उसे सफलता मिली। उसके पास अच्छा घर, अच्छी नौकरी और सुविधाएँ थीं।
लेकिन उसने अपने बचपन की एक बात कभी नहीं भुलाई।
वह अपनी दादी को हमेशा अपने साथ रखता था। सुबह उनके साथ बैठकर चाय पीता, उनकी दवाइयों का ध्यान रखता और उनके पुराने दिनों की बातें सुनता।
एक दिन दादी ने उससे पूछा, “बेटा, तूने जीवन में इतनी सफलता कैसे प्राप्त की?”
युवक ने दादी का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा, “दादी, आपने मुझे बचपन में सिखाया था कि बड़ा इंसान वह नहीं होता जिसके पास बहुत पैसा हो। बड़ा इंसान वह होता है जिसके दिल में दूसरों के लिए जगह हो। मैंने बस आपकी सीख को अपने जीवन में उतारने की कोशिश की है।”
दादी ने उसके माथे को चूमा और कहा, “बेटा, आज मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी सफल हो गई।”
उस दिन युवक ने दादी को आँगन में उसी फूलों की क्यारी के पास बैठाया, जहाँ कभी वह घुटनों के बल बैठकर मुस्कुराया करता था।
गुलाबी फूल आज भी खिले हुए थे। फर्क सिर्फ इतना था कि अब बच्चा बड़ा हो चुका था और दादी की उम्र और बढ़ गई थी।
लेकिन दोनों के बीच प्रेम पहले से भी गहरा था।
### कहानी का संदेश
बुजुर्ग हमारे घर की पुरानी वस्तुएँ नहीं, बल्कि हमारे परिवार की जीवित धरोहर हैं।
बच्चों को अच्छी शिक्षा देना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उन्हें संस्कार देना। जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है, उस घर में प्रेम, अनुभव और आशीर्वाद की कभी कमी नहीं होती।
माता-पिता और दादा-दादी का साथ जीवन का अनमोल उपहार है। उनके रहते उनकी कद्र कीजिए, क्योंकि समय बीत जाने के बाद केवल यादें रह जाती हैं।
एक सुंदर पंक्ति:
बचपन में जिन हाथों ने हमें चलना सिखाया, बुढ़ापे में उन हाथों को थामना हमारा फर्ज है। दौलत से बड़ा कोई खजाना नहीं होता, बुजुर्गों का आशीर्वाद ही जीवन का असली धन है।
लेखक: निर्मल दास मानकर
Nirmal Das Mankar
State Co-ordinator
DA-3, NCDHR
Gandhi Bhawan parisar,
Shyamla Hills road, Bhopal (MP)
+91 9303057516
+91 8989113762
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