अनुसूचित जनजाति के नाम पर कलंक आदिवासियों पर होने वाले अन्याय अत्याचार घटनाओं पर मुंह से एक शब्द नही। भाजपा ने दुर्गादास उर्फ डीडी ऊईके पर पुनः दुबारा भरोसा करते हुए प्रत्याशी बनाया।

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अनुसूचित जनजाति के नाम पर कलंक आदिवासियों पर होने वाले अन्याय अत्याचार घटनाओं पर मुंह से एक शब्द नही। भाजपा ने दुर्गादास उर्फ डीडी ऊईके पर पुनः दुबारा भरोसा करते हुए प्रत्याशी बनाया।

अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय को समाज की प्रगति जनसंख्या के अनुपात आधार पर संविधान के अनुच्छेद 350 के अनुसार राजनीति में प्रतिनिधित्व करने के लिए आरक्षण दिया गया है, अनुसूचित जाति जनजाति का व्यक्ति कितना भी शिक्षित सक्षम क्यो न हो देश की सामाजिक जातिवादी व्यवस्था में पिछड़ा और निम्न दर्जे का है। अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय को राजनीति में किसी दलों के रानेताओं की गुलामगिरी जी हुजूरी आदेश मानने के लिए संसद में चूप्पी बने रहने के लिए नही क्षेत्र और समाज के हित में कल्याण के लिए प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिनिधी बनाया गया है। बैतूल लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए लिए आरक्षित है। पिछले तीन पंचवर्षीय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी निर्वाचित होता रहा है। पिछले 3019 के लोकसभा चुनाव में गायत्री परिवार , शिक्षक संघ, भाजपा और आरएसएस जैसे चार संगठन से सक्रिय रूप जुड़े रहने के कारण भाजपा ने दुर्गादास उर्फ डीडी ऊईके को देकर प्रत्याशी बनाया और 360241 वोटिंग से ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई जिसको देखते हुए भाजपा ने इस बार 2024के लोकसभा चुनाव में दुर्गाप्रसाद उर्फ डीडी ऊईके पर भरोसा करते हुए प्रत्याशी बनाया है, कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी भाजपा आरएसएस  के लोग बिलकुल खुश है। देखा जाये तो गुरुजी गायत्री परिवार से जुड़े होने से शाकाहारी धार्मिक प्रवृत्ति के जाने वाले भाजपा प्रत्याशी डीडी ऊईके की समाजिक गतिविधियां शुन्य और पंच वर्षीय संसदीय कार्य काल में भी कोई उपलब्धि नही रही है, जिले में आदिवासियों पर होने वाले अन्याय अत्याचार घटनाओं पर मुंह से एक शब्द नही निकल रहा है। रोजगार के अभाव में उजड़ता जिला सारनी पाथाखेड़ा की विकराल समस्या जस का तस बनी हुई है। जब तक राजनैतिक आरक्षण है महत्वाकांक्षी लोगो की बल्ले-बल्ले है जिस समय राजनैतिक आरक्षण खत्म हो जायेगा तब सामान्य रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति के लोग चुनाव में खड़े होकर दिखाये ? उच्च सामान्य जाति समुदाय के लोग अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को राजनीति के लिए योग्य नही निम्न समझते है उनके घरों खेतों में गुलामगिरी लायक समझते है और वह समय शीध्र आ रहा है। कांग्रेस और अन्य राजनैतिक दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित नही किया है।

 

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