शोभापुर कालोनी में संविधान की प्रस्तावना की शपथ लेकर मनाया संविधान दिवस

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शोभापुर कालोनी में संविधान की प्रस्तावना की शपथ लेकर मनाया संविधान दिवस संविधान दिवस 

शोभापुर कालोनी पाथाखेड़ा में सुजाता महिला मंडल के नेतृत्व में २६ नवंबर २०२४ दिन मंगलवार को आम्बेडकरी उपासक उपासिकाओ ने नीला ध्वजारोहण डॉ बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संविधान की प्रस्तावना पढ़कर शपथ लेकर हर्ष उल्लास से संविधान दिवस मनाया। संविधान की प्रस्तावना 

हम भारत के लोग भारत को प्रभुत्व एक सम्पूर्ण समाजवाद धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए उनमें समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना स्वतंत्रता प्रतिष्ठा गरीमा की समानता के लिए राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्प होकर संविधान को २६ नवंबर १९४९को राष्ट्र को समर्पित हुआ था।संविधान की प्रस्तावना
हम भारत के लोग भारत को प्रभुत्व एक सम्पूर्ण समाजवाद धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए उनमें समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना स्वतंत्रता प्रतिष्ठा गरीमा की समानता और बंधुत्व के लिए राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्प होकर संविधान को २६ नवंबर १९४९को राष्ट्र को समर्पित हुआ था।
 संविधान दिवस पर जागरूकता पर कहा गया कि
संविधान भारत देश का सर्वोच्च कानून है इसका बौद्ध धम्म के जो समता स्वतंत्रता बंधुत्व न्याय के आधार पर बना है,२६ नवंबर १९४९ को संविधान का प्रारुप बनकर देश को समर्पित हुआ था आज दिनांक २६ नवंबर २०२४ को ७५वी वर्षगांठ है। भारत के समस्त नागरिकों को बगैर भेदभाव के समान सम्मान समान  स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। भारत संविधान विश्व का सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।वन वोट वन वेल्यू लोकतांत्रिक व्यवस्था निर्मित हुई।मत देने का और प्रतिनिधितत्व चुनाव का अधिकार मिला। संविधान ने विचार अभिव्यक्ति का अधिकार दिया।भारत का संविधान का निर्माण संविधान की संवैधानिक सात लोगों की कमेटी किसी स्वास्थ्य खराब रहता था, कोई विदेश में रहने चले गए, किसी की मृत्यु हो गई, कोई राज्य सरकारों के काम काज में व्यस्त रहते इस तरह डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के कंधे पर संविधान लिखने की जिम्मेदारी आ गई थी और जिसे बाबा साहेब आंबेडकर ने अपने स्वास्थ्य खराब की परवाह न करते हुए संविधान लिखने कार्य खुबसूरती से निभाया। संविधान लिखने में बाबा साहेब डॉ आंबेडकर को दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिन लगे थे।

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