भारत के ब्राह्मण विदेशी युरेशियम या मुलनिवासी ?

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भारत के ब्राह्मण विदेशी युरेशियम या मुलनिवासी ?

डॉ बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च सेन्टर नई दिल्ली से प्रकाशित विदेशी ब्राह्मणो की मातृभूमि युरेशिया के शिर्षक से ब्राह्मण विदेशी है इस नए विश्व स्तरीय डीएनए रिपोर्ट पर पुस्तक पढ़ने में आई , पुस्तक के पढ़ने से भारत में ब्राह्मण विदेशी है या नही यह विवाद निर्माण होता है। लेकिन वर्ष २००१ में मारकल बामशाद की डीएनए में कहा गया है कि ब्राह्मण,क्षत्रिय, वैश्यों की डीएनए रिपोर्ट में कहा गया है कि सारी दुनिया में ब्राह्मणो का डीएनए युरेशिया से मिलता है। और इससे सिद्ध किया कि ब्राह्मण भारत के मुलनिवासी नही है।वहीं पर पुरातत्व विभाग के प्रमुख राखीगढ़ी अनुसंधान प्रोजेक्टर बसंत शिंदे ने ब्राह्मणों को भारतीय बताया। लेकिन कहा गया है कि दुनिया भर के डीएनए वैज्ञानिको ने बसंत शिंदे के बयान को नकार दिया। १०० से ज्यादा लोगों ने बयान दिया है कि युरेशिया के जीन लोगों ने युरोप में हिंसा और तांडव किया उन्हीं लोगों ने भारत में भी हिंसा और तांडव किया है। और अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए भारत की संस्कृति को नष्ट किया है वैदिक संस्कृति को विस्थापित, वर्ण-व्यवस्था और जाति-व्यवस्था को लागू किया है। भारत की संस्कृति वास्तविक रूप से दृविंड और सिंधु सभ्यता रही है, भारत के मुलनिवासी के उद्गम पुर्वज आदिवासी है। ११दिसम्बर २०११ पत्रकार अखबार में छपी खबर में बताया गया कि भारतीय आर्यों के वंशज नहीं है। अमेरिकी जर्नरल में रिपोर्ट प्रकाशित है, भारतीय अनुवंशिक वैज्ञानिक के नये अध्ययन के मुताबिक इंडो आर्य युद्ध केवल कपोल कल्पना है।३५००वर्ष पुर्व इंडो युरोपीयन भाषा समुदाय ने मध्य एशिया से दक्षिण एशिया की ओर नाटकीय ढंग से प्रशासन किया था।

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