बौद्धो के अधिकारों के लिए महाबोद्धी महाविहार बुद्ध गया मुक्ति आंदोलन।

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बौद्धो के अधिकारों के लिए महाबोद्धी महाविहार बुद्ध गया मुक्ति आंदोलन।

बिहार प्रदेश के गया में भगवान तथागत बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। बुद्ध ज्ञान के स्थान पर विशाल विहार मंदिर निर्मित है,जिसे महाबोधी महाविहार कहा जाता जिसे युनेस्को विश्व धरोहर स्थल कहां जाता है,इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व है। बौद्धो को अपना धार्मिक पवित्र स्थल महाबोधि महाविहार बौद्ध गया अपने हाथों में नियंत्रित नही है, हिंदुओं के हाथों नियंत्रित है। महाबोधी महाविहार बौद्ध गया हिंदुओं के हाथों से मुक्त करने का आंदोलन विगत 12 फरवरी 25 से चल रहा है। मुक्ति आंदोलन को 43 दिन हो गए है और महाविहार बौद्ध गया मुक्ति अंतरराष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है ।महाविहार बौद्ध गया आंदोलन का विश्व स्तर के सभी बौद्धिष्ट देश अमेरिका में रहने वाले आम्बेडकरी बुद्धिस्ट का समर्थन मिल रहा है। भारत में जगह जगहो से समर्थन में रैली प्रदर्शन किया जा रहा है लोग मुक्ति आंदोलन में बौद्ध गया पहुंच रहे है संसद सभा में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन महाविहार बौद्ध गया हिंदुओं के बहुमत से मुक्त होने के आसार दिख नही रहा है। महाविहार बौद्ध गया टेम्पल  1949 के प्रबन्धन और प्रशासन को विनियमित करने के लिए अधिनियमित है इस अधिनियमित में महाविहार बौद्ध गया टेम्पल मंदिर मेनेजमेंट कमेटी में चार हिंदु और चार बौद्ध के सदस्य और अध्यक्ष के रुप में जिला मजिस्ट्रेट अधिनियम के अनुसार हिंदु नियुक्त है। संविधान के अनुच्छेद 13 कहता है कि 26 जनवरी 1950 से पहले के सभी कानुन शुन्य हो जाते है तो BTMC-1949 कानून शुन्य क्यों नही मान्य कैसे। अनुच्छेद 25-26 धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता। महाविहार बौद्ध गया टेम्पल बौद्धो का पवित्र स्थान है तो बौद्धो को उनके पवित्र स्थान को पुर्ण नियंत्रित करने का अधिकार क्यों नही। अनुच्छेद-14 समानता का अधिकार देता है।हिंदुओ का मंदिर हिंदुओं को, मुस्लिमो का मस्जिद मुस्लिमों को, गुरुद्वारा सिक्खों को गिरजाघर ईसाईयों को तो बौद्धो का महाविहार बौद्ध मंदिर बौद्धो को क्यों नही। निष्कर्ष निकलता है कि महाविहार बौद्ध गया मंदिर को बौद्धो को देने में भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा साथ ही संविधान में दिए गए अधिकारों का नही दिया जाना अनुच्छेद नियमों का उल्लघंन किया जा रहा है।

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