शोषितों की लढ़ाई महाड सत्याग्रह से ताकद अर्जित करे !
शोषितों की लढ़ाई महाड सत्याग्रह से ताकद अर्जित करे !
विशाल कडवे
डाँ. बाबासाहाब भिमराव अंम्बेडकर ने महाड चवदार तालाब का सत्याग्रह कर के भारतीय शोषितो, अछुतो को पाणी पिने का हक्क दिलाया और ब्राम्हणी प्रतिक्रांती के खिलाप क्रांती की सुरूवात की|
इस क्रांती की सुरूवात करने से पहले डाँ. बाबासाहाब अंम्बेडकर अपने अनुयायीयों को भिमा कोरेगाव ले जाकर उस इतिहास को उजागर करते है, जहाँ ब्राम्हणी प्रतिक्रांती के खिलाफ बौध्द क्रांती का पहला विद्रोह महार सैनिको द्वारा पेशवाई के खिलाप उठ खडा़ हूँआ था|
बख्तियार खिलजी के आक्रमण के बाद मनुष्यता का नंगा नाच चरमसीमा पर पँहूचा था| मानवता बिलबिलाकर रो रही थी| इस रोती बिलगती मानवता की पुकार सुनने, सन १९२७ तक राह देखनी पडी और डॉ अंम्बेडकरजी ने ब्राम्हणी पाश मे जख़डी हूई मानवता को छुटकारा दिलाया| याने भिमा कोरेगाव मे उठा विद्रोह, महाड तालाब से लेकर कालाराम मंदिर होते हूये छप्पन की धम्मक्रांती मे बदल जाता है|
आज फिर से प्रतिक्रांती अपना सर उठा रही है और मानवता को ध्वस्त करने अपने कदम बढा रही है| इस प्रतिक्रांती के बढते कदम रोकने की जिम्मेवारी आंबेडकरी युवाओं पर आ पडी है| क्या आंबेडकरी युवा इस प्रतिक्रांती को रोक पायेगा..?
तो इसका जवाब ‘हाॅ’ मे मिलता है| शर्त है के- आंबेडकरी युवाओं ने राजकीय स्वार्थी सोच को मिटाकर,अपने आपसी झगडे़, अहंकार और व्यक्तीवादी सोच से परे..,भाईचारा और समुहवादी तत्व अपनाकर संघशक्ती के साथ दुश्मन से लढना..! यकीनन विजय होगा |
महाड सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में चलो हम प्रण करे की, मानवता को रौंधती हुई प्रतिक्रांती के बढ़ते कदम रोकने, बुध्द ने दिया समुहवाद और डॉ बाबासाहाब ने दी हुई संघशक्ती की ताकद का शस्त्र बनाकर, फिर एक बार भिमा कोरेगाव खड़ा करे और प्रतिक्रांती को मार भगाये|
महाड चवदार तालाब सत्याग्रह शताब्दी वर्ष- चिरायु हो..!
विलास नरांजे
वणी जि.यवतमाळ
मो 9673452645
