र एक संवेदनशील, भावनात्मक और सामाजिक संदेश देने वाली काल्पनिक कहानी प्रस्तुत है। इसमें पात्रों और घटनाओं के नाम काल्पनिक रखे गए हैं। कहानी का उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा, पुलिस की जिम्मेदारी, माता-पिता की चिंता और समाज की संवेदनशीलता को उजागर करना है। ” बीस दिनों का अंधेरा !…” एक बेटी की तलाश, एक परिवार का संघर्ष और पुलिस की उम्मीद लेखक: निर्मल दास मानकर मो. न. 73540899988 November 4, 2026November 4, 2026
खून बेचकर शिक्षा – सपनों की कीमत लेखक : निर्मल दास मानकर मो.7354089988 November 3, 2026November 3, 2026
एक माँ की ममता ने जगाई जीवन की उम्मीद विधा : सामाजिक एवं भावनात्मक कहानी लेखक : निर्मल दास मानकर 7354089988 ” घर का चिराग” October 31, 2026November 2, 2026
शिक्षा मे आरक्षित पद खाली क्यों?आरक्षण मजाक या सामाजिक न्याय से दुरी संविधान मे अधिकार लेकिन व्यवस्था मेकितनी हिस्सेदारी? October 26, 2026October 26, 2026
डाँ. बाबा साहब आम्बेडकर की 22प्रतिज्ञा रुढीवाद अंधविश्वास सेबाहर निकालना अर्थहीन खर्नचीले कर्मकांड से बाहर निकालना मानव मे सामनता,मानवीय गरीमा स्वाभिमान आर्दश मानव समता स्वतंत्रता बधुत्व के लिए अछुत वंचित दलित पिछडा समाज को बौद्ध धर्म और बाबा साहब की 22प्तिज्ञा को मान्य और अपनाने के सिवाय कोई विकल्प नही। October 25, 2026October 28, 2026
अपराध की सजा निअपराधी को क्यों मुस्कान की नन्ही मासूम बेटी का क्या कसुर? मुस्कान और साहिल की मृत्युंदंड सजा काल्पनिक सामाजिक लेखक:निर्मलदास 7354089988 October 23, 2026October 24, 2026