भारतीय रिपब्लिकन पार्टी का 3अक्टुबर 67 वा स्थापना दीन।

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भारतीय रिपब्लिकन पार्टी का 3अक्टुबर 67 वा स्थापना दीन।

शासनकर्ता जमात बनाने के लिए दलितों के मसिहा डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की संकल्पित राजनीति दल भारतीय रिपब्लिकन पार्टी की 3अक्टुबर 1957स्थापना हुई थी। भारतीय रिपब्लिकन पार्टी का गठन के समय पहली बैठक में सर्वश्री एन शिवराज, यशवंत आम्बेडकर पीटी बोराले,एजी पवार, दत्ता कट्टी दा.ता.रुपवते उपस्थित थे।संविधान निर्माता का बौधिसत्व परमपुजनीय डॉ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर ने हिन्दु सामाजिक समाज बहिष्कृत होने वाले अस्पृश्यो अछुतों के हक अधिकार के लिए 1927 को हितकारिणी सभा, 1930 डिप्रेस्ड क्लासेस फेडरेशन 1936 में मजदुरो के स्वतंत्र मजदूर संघ इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी ,20 जुलाई 1942 को आंल इंडिया शेड्यूल कास्ट फेडरेशन का निर्माण किया था।जिसका उद्देश्य था कि दलित अस्पृश्य अछुत समाज के हितों हक और अधिकार के लिए संघर्ष करना लड़ना था। अंग्रेज हुकूमत में उन्हें इन राजनीतिक संगठन से कुछ सफलता भी मिली लेकिन अपेक्षित नही थी। भारतीय राष्ट्रीय राजनीति में आल इंडिया शेड्यूल कास्ट फेडरेशन नाम ठीक नही लगने से डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने 30 सितंबर 1956 को आंल इंडिया शेड्यूल कास्ट फेडरेशन को बर्खास्त कर अलग आदर्श व्यापक भारतीय रिपब्लिकन पार्टी नाम रखने का फैसला लिया। और 14 अक्टूबर 1956 को धर्म परिवर्तन दीक्षा कार्यक्रम होने की वजह इस दौरान जिस पर अपने समान विचारधारा वाले सामाजिक राजनैतिको से विचार-विमर्श भी और सुझाव मांगे।दौरान 6 दिसंबर 1956 डॉ बाबासाहेब आंबेडकर का महानिर्वाण हो गया। और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के हाथों से वंचित पिछड़े बहुजन समाज के हितों और कल्याण,संरक्षण के लिए स्वतंत्र राजनीति संगठन भारतीय रिपब्लिकन दल का गठन होना था जो अधुरा रह गया। डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर के अनुयायियों ने बाबा साहेब महानिर्वाण दुःखत अवस्था में भारतीय रिपब्लिकन का गठन किया। जिसके पहले मद्रास के दलित नेता अध्यक्ष एन शिवराज और बेरिस्टर राजाभाऊ खोबरागड़े महामंत्री बनाये गये। जिसकी विचारधारा स्पष्ट संविधानवाद, गणतंत्रतवाद, आम्बेडकरवाद, प्रगतिवाद, धर्मनिरपेक्षता और समानतावाद रही है।जिस प्रकार से संयुक्त अमेरिका में रिपब्लिकन अब्राहम लिंकन नेतृत्व में निग्रो की गुलामी नष्ट हुई उसी तरह रिपब्लिकन नेतृत्व में भारत से जातिवाद भेदभाव खत्म हो जायेगा वजह है। लेकिन आज की भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के नेता अतिमहत्वाकांक्षी स्वार्थी से पार्टी अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है।अनेक गुटों ने बाबा साहेब आंबेडकर का सपुत समाज हितैषी बताते हुए राजनीति दुकान चला रहे। डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के सच्चे अनुयाई आर्थिक रूप से कमजोर होते हुए भी हक और अधिकार के लिए बाबा साहेब आंबेडकर के नाम प्रेरणा संघर्ष लड़ रहे है।अभी जिस तरह का दलित राजनीति की स्थिति है उससे तो डॉ बाबासाहेब आंबेडकर शुद्ध विचार वाली भारतीय रिपब्लिकन पार्टी की आवश्यकता है।

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