धर्मगुरुओं ने संभाली बाल विवाह की रोकथाम की कमान बैतूल में प्रदीपन संस्था द्वारा चलाया गया व्यापक जागरूकता अभियान

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धर्मगुरुओं ने संभाली बाल विवाह की रोकथाम की कमान

बैतूल में प्रदीपन संस्था द्वारा चलाया गया व्यापक जागरूकता अभियान

बैतूल। जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्यरत प्रदीपन संस्था ने अक्षय तृतीया के पर जिले में एक भी बाल विवाह न होने देने के लिए धर्मगुरुओं के सहयोग से एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस पहल का उद्देश्य शादी-ब्याह के मौसम में बाल विवाह को रोकना था। अभियान को व्यापक समर्थन और सराहना मिली, खासकर जब सभी धर्मों के धर्मगुरुओं ने बाल विवाह के खिलाफ खुलकर अपनी राय व्यक्त की और इसे समाज के लिए घातक बताया। 
इस अवसर पर गायत्री परिवार के लखन विषेंद्र और रविशंकर पारखे ने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के विकास में बाधा है, बल्कि यह सामाजिक रूप से भी अनुचित है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं और बालकों की सही उम्र में विवाह होना चाहिए ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व हो सकें। कोरकू समाज के भगत मदन चौहान ने कहा कि कम उम्र की लड़कियों को शादी के बाद कई तरह की बीमारियों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा और संस्कार देकर ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म किया जा सकता है। विश्वकर्मा समाज के पंडित रामधर द्विवेदी ने कहा कि हमें बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए ताकि वे सही और गलत का अंतर समझ सकें और अपने निर्णय स्वयं ले सकें। बौद्ध धर्म की गीता नागले और धनराज चंदेलकर ने बाल विवाह का मुख्य कारण माता-पिता की अशिक्षा बताया और कहा कि समाज में जागरूकता लाना आवश्यक है।
—बच्चों को स्कूल स्तर पर ही बाल विवाह कानून की जानकारी दी जाए—
शिक्षक एवं समाजसेवी शैलेंद्र बिहारी ने कहा कि शिक्षा मूल्य आधारित होनी चाहिए और बच्चों को स्कूल स्तर पर ही बाल विवाह कानून की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चे अपने माता-पिता को पोस्टकार्ड लिखें और आग्रह करें कि जब तक लड़कियों की उम्र 18 और लड़कों की 21 नहीं हो जाती, तब तक उनका विवाह न किया जाए। डॉ. लिपि पद्माकर ने बाल विवाह से होने वाले शारीरिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला, जबकि जयस प्रदेश संयोजक जामवंत कुमरे ने बाल विवाह को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए कहा कि समाज के हर बड़े कार्यक्रम में अब बाल विवाह के विरोध में जागरूकता फैलाई जाएगी।
—बाल विवाह रोकथाम के लिए करेंगे जन-जागरूकता—
इस अवसर पर प्रदीपन संस्था की निदेशक रेखा गुजरे ने बताया कि देशभर में बाल विवाह की रोकथाम के लिए काम कर रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क के अंतर्गत प्रदीपन बैतूल जिले का सहयोगी संगठन है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने में पुरोहितों, मौलवियों और पादरियों की भूमिका अहम है, क्योंकि विवाह इनकी उपस्थिति के बिना संपन्न नहीं हो सकता। इसलिए धर्मगुरुओं को इस अभियान से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि हमने धर्मगुरुओं को यह समझाया कि बाल विवाह वास्तव में बच्चों के साथ बलात्कार के बराबर है। अठारह साल से कम उम्र की बच्ची के साथ वैवाहिक संबंध बनाना पॉक्सो कानून के तहत दंडनीय है। यह अत्यंत संतोष की बात है कि अब पंडित और मौलवी भी इसे समझते हुए इस अभियान में सक्रिय समर्थन दे रहे हैं। संस्था ने कहा कि अब जिले के सभी सार्वजनिक स्थानों पर बाल विवाह रोकथाम के संदेश वाले दीवार लेखन और सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि जन-जागरूकता को और बढ़ावा दिया जा सके।
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