सुप्रीम कोर्ट ने नगद लेन देन के दावों पर कसी नकेल । आयकर कानून का नगद लेन देन के मामलों में पालन आवश्यक हुआ।

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सुप्रीम कोर्ट ने नगद लेन देन के दावों पर कसी नकेल । 

 आयकर कानून का नगद लेन देन के मामलों में पालन आवश्यक हुआ।

बैतूल। मप्र राज्य। भारत की सुप्रीम कोर्ट ने भारत संघ में शामिल सभी राज्य सरकारों, केन्द्र शाशित प्रदेश, समस्त हाई कोर्ट एवं जिल न्यायालयों को नगद लेन देन के मामलों में आयकर कानून 1961 का पालन हेतु निर्देश जारी कर दिए हैं। संपत्ति अंतरण के मामलों में आयकर कानून का पालन आवश्यक हो गया हैं। इसका व्यापक प्रभाव आगे जाकर देखने को मिलेगा। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार संपत्ति अंतरण में नगद लेन देन होता हैं तो पंजीयन विभाग के लिए जिला आयकर विभाग को सूचित करना आवश्यक हो गया हैं। जिला न्यायालय में 02 लाख या उससे अधिक का नगद लेन देन का दावा पेश किया जाता हैं तो न्यायालय द्वारा आयकर विभाग को सूचित किया जायेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने रबानामस क्षैक्षणिक संस्था बनाम बी0 गुनाशेखर व अन्य सिविल अपील क्र0 5200/2025 में 75 लाख रू0 के नगद लेन देन के मामलें में दायर अपील को स्वीकार करते हुए आयकर कानून के पालन हेतु विशेष देशा निर्देश जारी कर दिए हैं। यह मामला संपत्ति अंतरण का था जिसमें गैर अपीलार्थी ने 75 लाख रू0 का दावा  अपीलार्थी के विरूद्ध पेश किया था। न्यायालय में पेश किए गए दावे से आयकर कानून के प्रावधानों का उल्लंघन होता था जिस कारण  दावा चलने योग्य नहीं था। 

सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2025 के आदेश में पारित इस दिशा निर्देश का व्यापक असर दिखाई देगा। न्यायालय में नगद लेन देन 02 लाख या 02 लाख रू0 से अधिक की रकम वसूली का दावा पेश किया जाता हैं तो दावा करने वाले पक्षकार को आयकर विभाग में पेनाल्टी जमा करनी होगी। जिला न्यायालय में विचाराधीन नगद लेन देन के मामलों की सूचना न्यायालय द्वारा आयकर विभाग को देने से सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी तथा नगद लेन देन पर रोक लगेगी। आयकर कानून में 20 हजार रू0 से अधिक का नगद लेन देन अपराध हैं जिसमें नगद लेन देन करने वाले दोनो दोषी होते हैं। 

संपत्ति अंतरण के दावों में नगद लेन देन दिखाना या विक्रय पत्र में नगद लेन देन दिखाना अथवा न्यायालय में नगद रकम लेन देन का परिवाद पेश करना भारी भरकम आयकर कानून की पेनाल्टी को आमंत्रित करना हैं।

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