ग्वालियर हाईकोर्टः संविधान निर्माता की प्रतिमा लगेगी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय ?

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ग्वालियर हाईकोर्टः संविधान निर्माता की प्रतिमा लगेगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय ?

डॉ बीआर अंबेडकर बाबा साहेब भारत देश का सर्वश्रेष्ठ संविधान निर्माता है जिनके संविधान से देश की गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हो रही है।सारा विश्व उनको नमन करता है उनकी जयंती समारोह धूमधाम से मनाता है।

 डॉ बाबा साहेब आंबेडकर को बीसवीं सदी का दुनिया का सबसे बड़ा बुद्धिमान व्यक्ति माना है।कोलम्बिया युनिवर्सिटी टापर्स विद्वानों में डॉ बाबा साहेब आंबेडकर को पहला स्थान दिया है। डॉ बाबा साहेब आंबेडकर मानवतावादी दृष्टिकोण वाले महापुरुष रहे है लेकिन बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद और जहर कभी अमृत नही हो सकता है।

 ऊंच-नीच भेदभाव जहर भरे सामंती मानसिक रोगियों से मानवता की कैसे उम्मीद की जा सकती है। मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट न्यायलय परिसर मे संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा का विरोध और विवाद करना संविधान के सामाजिक न्याय अपमान है।

आज़ाद भारत के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब कुछ अधिवक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने का विरोध किया है। यह विरोध न केवल विचारधारा की टकराहट को उजागर करता है, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था के भीतर व्याप्त जातिवादी मानसिकता की गहरी परतों को भी सामने लाता है।

गौरतलब है कि जब जयपुर हाईकोर्ट परिसर में मनु की मूर्ति स्थापित की गई, तब किसी प्रकार का विरोध नहीं हुआ। परंतु जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर खंडपीठ में बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापित करने की बात आई, तो कुछ सामंतवादी, मनुवादी वकील विरोध में खड़े हो गए और धमकी भरे बयान देने लगे।

परिस्थितियाँ तब बदलीं जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, श्री सुरेश कैत—जो स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं—ने प्रतिमा स्थापना को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया। उन्होंने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापित हो सकती है, तो उच्च न्यायालयों में भी उनका स्मारक स्थापित किया जाना स्वाभाविक है। यह निर्णय?

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