Skip to the content
भाजपा-आरएसएस की केंद्रीय भाजपा सरकार ने सभी स्वायत्त संस्थाओं को अपना गुलाम बना लिया है !
केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त ने आज प्रेस में सरासर झूठ बोला। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद किसी ने शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई? इतनी देर से अब इस चुनाव के संदर्भ में इसकी बात क्यों हो रही है? उनका बयान इसी आशय का था। लेकिन यह आदमी सरासर झूठ बोल रहा था। वह भाजपा की भाषा बोल रहा था। एक नौकरशाह इतनी अभद्र भाषा में, इतनी अशिष्ट भाषा में कैसे बोल सकता है? वंचित बहुजन अघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश और बालासाहेब आंबेडकर ने शुरू से ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर आपत्ति जताई थी। बालासाहेब आंबेडकर ने चुनाव के निर्धारित समय शाम 6 बजे के बाद डाले गए 76 लाख वोटों के बारे में जानकारी मांगी थी। बेशक, उन्होंने उस निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवारों के माध्यम से पीठासीन अधिकारी से यह जानकारी मांगी थी। लेकिन जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, इस मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से न निभाते हुए मामले को खारिज कर दिया, यह अलग बात है। लेकिन इस बीच हुई कुछ सुनवाइयों में केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रतिनिधि, यानी वे प्रतिवादी के तौर पर अदालत में मौजूद रहे। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा मामला खारिज किए जाने के बाद से मा अद्दो बालासाहेब अंबेडकर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पहली सुनवाई कल, 18.8.2025 को हो रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को कल अदालत में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्त आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरासर झूठ बोल रहे हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग एक स्वायत्त आयोग है। इस आयोग का किसी सत्तारूढ़ दल के पक्ष में बोलना संविधान का अपमान है। लेकिन हाल के दिनों में भाजपा-आरएसएस की केंद्रीय सरकार ने सभी स्वायत्त संस्थाओं को अपना गुलाम बना लिया है। इस वजह से ये संस्थाएँ स्वायत्त होते हुए भी सच्चा रुख अपनाने से डरती हैं। लेकिन चूँकि लोकतंत्र को ज़िंदा रखना है, इसलिए चुनाव आयोग अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा। केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त ने आज प्रेस में सरासर झूठ बोला। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद किसी ने शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई? इस चुनाव की चर्चा इतनी देर से क्यों हो रही है? उनका बयान इसी तरह का था। लेकिन यह आदमी सरासर झूठ बोल रहा था। वह भाजपा की भाषा बोल रहा था। एक नौकरशाह इतनी अभद्र भाषा में, इतनी अभद्र भाषा में कैसे बोल सकता है? वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश और बालासाहेब आंबेडकर ने चुनाव के तुरंत बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर आपत्ति जताई थी। बालासाहेब आंबेडकर ने चुनाव के निर्धारित समय शाम 6 बजे के बाद डाले गए 76 लाख वोटों के बारे में जानकारी मांगी थी। बेशक, उन्होंने उस निर्वाचन क्षेत्र के पार्टी उम्मीदवारों के माध्यम से पीठासीन अधिकारी से यह जानकारी मांगी थी। लेकिन जानकारी प्रदान नहीं की गई। इतना ही नहीं, इस मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाए बिना मामले को खारिज कर दिया, यह हिस्सा अलग है। लेकिन इस बीच हुई कुछ सुनवाइयों में, केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रतिनिधि, यानी वे प्रतिवादी थे, उस समय अदालत में मौजूद थे। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा मामला खारिज किए जाने के बाद मा अद्दो बालासाहेब आंबेडकर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पहली सुनवाई कल, 18.8.2025 को है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को कल अदालत में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है, लेकिन यह आश्चर्य की बात थी कि केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्त आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सफेद झूठ बोल रहे हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग एक स्वायत्त आयोग है। इस आयोग का किसी सत्तारूढ़ दल के पक्ष में बोलना संविधान का अपमान है। लेकिन हाल के दिनों में भाजपा-आरएसएस की केंद्रीय भाजपा सरकार ने सभी स्वायत्त संस्थाओं को अपना गुलाम बना लिया है। इसलिए स्वायत्त होने के बावजूद, ये संस्थाएं सही रुख अपनाने से डरती हैं। *हालांकि, देश में न्याय व्यवस्था जीवित है। जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कायम है। चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट में पड़े 76 लाख वोटों का हिसाब देना ही होगा, क्योंकि आयोग पर से भरोसा उठ रहा है।
प्रेषक
सुरेश शिरसाट,
अकोला दिनांक 17.8.2025