कल्याण और जिसकी जितनी संख्या उतनी उसकी भागीदारी के लिए जाति जनगणना अनिवार्य?

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कल्याण और जिसकी जितनी संख्या उतनी उसकी भागीदारी के लिए जाति जनगणना अनिवार्य ?

देश में जनगणना होने जा रही है लेकिन जाति जनगणना नही हो रही है। जिस पर बहस जारी है जाति जनगणना के विरोधियों का तर्क है कि जाति मतभेद गहरायेगे और आंकड़े चुनावी धुर्वीकरण का हथियार बनने लगेगा। हजारों साल पहले ब्राह्मणों ने अपने बनाए हुए धर्मशास्त्रों में वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था का निर्माण किया उप-जातियों में बांटा भेद-भाव निर्माण किया उन्हें जल, ज़मीन, जंगल से बेदखल किया उनके पढ़ने-लिखने के अधिकार से,धन-संपत्ति रखने के अधिकार से वंचित रखा और उन्हें सारे अधिकारों से वंचित रखा गया और उनको प्रताड़ित कर उनका शोषण करता रहा और जब उन वंचित शोषित समाज को संविधान से पढ़ने लिखने के अधिकार ,धन-संपत्ति रखने के अधिकार मिलने लगे । बहुजन समाज पढ़ने-लिखने लगी उनमें जागरूकता पैदा हुईं और संगठित होने लगे तो एकता और अखंडता में फूट डालने के लिए जाति वर्गीकरण  का फैसला सुनाया,क्रिमिलेअर का सुझाव दिया तब समाज की एकता और अखंडता को टूटने का डर नही सताया और आज बहुजन जाति जनगणना की मांग कर रहे है तो साहब कह रहे है कि ” जातिगत जनगणना ” से समाज की “एकता और अखंडता” को खतरा हो सकता है सामाजिक न्याय और विकास की दिशा के लिए जातिगत जनगणना महत्वपूर्ण है। जाति जनगणना से जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता चलने पर योजनाएं बनाने में मदद होगी। जरुरतमंदो को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है। आजादी के बाद 1951 में पहली जातिगत जनगणना हुई। अनुसूचित जाति जनजाति के आंकड़ों को सिमित कर दिया गया। इसके बाद 1961,1971,1981,1991,2001,2011मे जनगणना हुई इसमें जातिगत जनगणना नही हुई। जातिगत जनगणना से भारत की विभिन्न जाति समुह की सामाजिक आर्थिक स्थितियों का आंकड़ा सामने आता है। प्रत्येक दस वर्ष में जनगणना का प्रावधान है। वर्ष 2011मे सामाजिक आर्थिक जनगणना हुई लेकिन जाति जनगणना नही हुई। मनमोहन सरकार ने दोनों सदनों में चर्चा करके जनगणना करने की मंजूरी दी थी। जाति जनगणना न करवाने के पीछे जिसकी जनसंख्या जीतनी उनकी भागीदारी उतनी का भय तों नही है। क्योंकि की भारत एक तो हिंदू राष्ट्र नही है लोकतांत्रिक बहुधर्मी  राष्ट्रीय देश है।मुलनिवासी एससी एसटी ओबीसी अल्पसंख्यक बहुसंख्यक 85 प्रतिशत है जो शासक नही बन पाई है और हिंदू धर्म के आंकड़ों पर 15 प्रतिशत ब्राहमणी मनुवादी शासन कर्ता है। जाति जनगणना से हिंदू वोट बैंक  और हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना बिखरने का डर है?

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