इस साल 2025 में भारत सरकार की एनपीआर जनगणना की घोषणा से जनगणना की जा सकती संभावना है।राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में जाति के कालम में सिर्फ अनुसूचित जाति ही लिखे ताकि अनुसूचित जाति समाज का जनसंख्या आंकड़ा सरकार तक पहुंचेगा। जनगणना का उद्देश्य अनुसूचित जाति की शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है।संवैधानिक जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति समाज के लोगों अधिकार भी मिलते रहेंगे। इतिहासिकानुसार अनुसूचित जाति की अस्पृश्य जातिया हिन्दु धर्म की जातियां नहीं है बाहर की जातियां है। एक स्वतंत्र वर्ग के लोग हैं। वर्ष १९३१ जनगणना में अनुसूचित अस्पृश्य जातियों की सुची तैयार की गई थी। जिसमें ११०८ जातिया शामिल हुई थी, और उसी सुची के आधार पर बाबा साहेब आंबेडकर ने अंग्रेजों से लड़कर मानवीय अधिकार दिलाने में सफल हुए थे। अनुसूचित जाति दलित वर्ग की संवैधानिक पहचान है।प्रशिक्षण एवं मुक्ति आन्दोलन मे उपस्थित पदाधिकारीयो प्रणाम दिये जानकारी-सुरेश वानखेड़े प्रदेश प्रवक्ता भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा दि बुद्धिस्ट सोसायटी...
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संविधान 🇮🇳 26 जनवरी 1950 जब भारत गणराज्य बना — नागरिकों से किए गए वादे क्या थे? 26 जनवरी 1950...
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